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02 अक्टूबर 2010

15 भाषाओं में होंगी 400 पुस्तकें

अब उच्च शिक्षा में अध्ययनरत विद्यार्थियों व शोधार्थियों को भाषा ज्ञान की कमी के चलते विषय ज्ञान की समस्या नहीं आएगी। देश में नेशनल ट्रांसलेशन मिशन शुरू हो चुका है। भारतीय भाषा संस्थान मैसूर ने इस साल 20 महत्वपूर्ण पुस्तकों का ट्रांसलेशन शुरू कर दिया है।

संस्थान के निदेशक डॉ. राजेश सचदेव ने शुक्रवार को उदयपुर में बताया कि विज्ञान-गणित आदि विभिन्न विषयों की देश-विदेश की ऎसी कई पुस्तकें हैं जो ज्ञान का भण्डार हैं, लेकिन, वे भारतीय भाषाओं में नहीं होने के कारण देश के छात्र-छात्राएं उनका लाभ नहीं ले पाते। इसी के मद्देनजर केंद्र सरकार ने यह मिशन शुरू किया, जिसके तहत पांच साल के लिए 75 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है। पांच साल के दौरान ऎसी 400 पुस्तकों का ट्रांसलेशन किया जाएगा। यह ट्रांसलेशन संविधान में अघिसूचित महत्वपूर्ण 15 भाषाओं में होगा। सभी पुस्तकों का चयन किया जा चुका है। इस साल 20 पुस्तकों का अनुवाद शुरू हो चुका है(राजस्थान पत्रिका,उदयपुर,2.10.2010)।

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