मुख्य समाचारः

सम्पर्कःeduployment@gmail.com

02 अक्टूबर 2010

उदयपुर का विद्याभवन बुनियादी स्कूलःविचारों में ढल रहा बचपन

उदयपुर के विद्याभवन बुनियादी स्कूल में आपको बच्चे खेल के मैदान की सफाई करते या मेहमाननवाजी करते नजर आए तो अचरज की कोई बात नहीं, क्योंकि यह उनकी तालीम का हिस्सा है। महात्मा गांधी के विचारों को अमल में लाकर यहां बच्चों में इंसानियत ही नहीं एक सफल जीवन की बुनियाद रखी जा रही है। यहां का काम कोई छोटा या बड़ा नहीं होता और अपना काम खुद करना चाहिए। गांधीजी के इन्हीं विचारों पर यहां बचपन ढल रहा है। तीसरी से दसवीं कक्षा तक पढ़ने वाले कई बच्चों में खुद काम करने की तालीम ने इंजीनियरिंग में रुचि पैदा की और कई आईआईटी तक में चुने गए हैं।

लड़के बनाते हैं खाना:

स्कूल में किताबी तालीम के अलावा सिलाई, सुथारी, इलेक्ट्रिशियन, कंप्यूटर बेसिक्स, कागज बनाने जैसे कार्यो की व्यावहारिक शिक्षा भी दी जाती है। लड़के-लड़कियों के साथ कोई भेदभाव नहीं है। यही कारण है कि यहां लड़कियां सुथारी का काम सीखती है तो लड़के सिलाई के साथ खाना बनाना सीखते हैं।

प्राचार्य डॉ. अंजू शर्मा बताती हैं कि स्कूल में बच्चे रोज गांधीजी के प्रिय भजन ‘वैष्णव जन तो तेणो कहिए’ और ‘रघुपति राघव राजाराम’ गाते हैं। स्कूल में कस्तूरबा गांधी की स्मृति में 1942 में रोपा गया पौधा आज वट वृक्ष के रूप में खड़ा है। इसके नीचे बच्चे रोज मौन, ध्यान व प्रार्थना करते हैं।

डॉ. जाकिर हुसैन ने किया उद्घाटन:

रामगिरि में चल रहे बुनियादी स्कूल की नींव 27 अक्टूबर 1940 को तब की मेवाड़ रियासत के प्रधानमंत्री टी. वी. राघवाचार्य ने रखी। स्कूल का उद्घाटन 23 अप्रैल 1941 को डॉ. जाकिर हुसैन (जो बाद में तीसरे राष्ट्रपति बने) ने किया।
रतन टाटा भी हुए प्रभावित :
प्रसिद्ध उद्योगपति रतन टाटा इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने 1998 में स्कूल परिसर में एक भवन तैयार करवाया। इसी भवन में बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा दी जाती है(देवेंद्र शर्मा,दैनिक भास्कर,उदयपुर,2.10.2010)।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

टिप्पणी के बगैर भी इस ब्लॉग पर सृजन जारी रहेगा। फिर भी,सुझाव और आलोचनाएं आमंत्रित हैं।