सुरसा के मुंह की तरह बढ़ रही महंगाई के सामने आम आदमी की आमदनी छोटी पड़ गई है। प्रमुख उद्योग चैंबर एसोचैम की रिपोर्ट के मुताबिक पिछले एक साल में जरूरी वस्तुओं के दाम जितनी तेजी से बढ़े हैं, उसके मुकाबले लोगों की प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी काफी कम रही है। इससे जरूरी वस्तुओं की कीमत और प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि का अनुपात गड़बड़ा गया है।
उद्योग चैंबर के इस अध्ययन में कहा गया है कि अगस्त, 2009 से इस साल अगस्त के बीच दूध, गेहूं, दाल और अंडा जैसे सात जरूरी जिंसों के दाम में औसतन 18 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं इस दौरान उपभोक्ताओं की आमदनी को दिखाने वाली प्रति व्यक्ति आय में केवल 10.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। वित्त वर्ष 2009-10 में औसत भारतीय की प्रति व्यक्ति आय 4,404 रुपये बढ़कर 44,345 रुपये सालाना हो गई। यह वर्ष 2008-09 में 40,141 रुपये थी। रिपोर्ट के मुताबिक मसालों के दामों में सबसे ज्यादा 40 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। इसी प्रकार अंडा, मछली और मांस की कीमत 27 फीसदी तक बढ़ी। इस दौरान दूध 26, चाय 11, गेहूं 10 और दालें 9 फीसदी महंगे हुए। ताजा आंकड़ों में भी थोक मूल्यों पर आधारित खाद्य महंगाई की दर 16 फीसदी से ऊपर चल रही है। दाल जैसी कुछ चीजों में मांग-आपूर्ति में अंतर, कच्चे माल की ऊंची लागत, लोगों के खानपान की आदत में बदलाव समेत तमाम अन्य कारणों से खाद्य वस्तुओं की कीमतें बढ़ी हैं(दैनिक जागरण,11.10.2010)।
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