छठे वेतनमान में मेडिकल अलाउंस की धनराशि पर्याप्त नहीं बढ़ने से केंद्रीय सेवा के सेवानिवृत्त बुजुर्ग पेंशनर्स काफी परेशान हैं। श्रीनगर(गढ़वाल) सहित पहाड़ में सेवानिवृत्त केन्द्रीय कर्मचारियों की संख्या काफी अधिक है। इन लोगों के सामने बढ़ती उम्र की परेशानियों के साथ ही उनकी देखभाल करने वाला कोई न होने की भी समस्या है। अधिकांश के बच्चे पहाड़ से पलायन कर मैदानी क्षेत्रों में नौकरी कर रहे हैं। अपनी समस्या को लेकर पेंशनर्स ने सांसद सतपाल महाराज के जरिए प्रधानमंत्री को आवश्यक कार्रवाई की मांग पर पत्र भी भेजा है।
भारत सरकार की सेवा से अवकाश ग्रहण करने के बाद पहाड़ के गांवों में रह रहे इन कर्मचारियों के सामने अपने स्वास्थ्य को ठीक बनाए रखने और समुचित चिकित्सा प्राप्त करने की भी समस्या जब तब खड़ी हो जाती है। गांवों में न तो डाक्टर और न ही अस्पताल जिससे इन्हें बीमार होने पर शहरी क्षेत्र में आना पड़ता है और इनको प्रतिमाह मेडिकल अलाउंस मात्र 300 रुपये ही मिल रहा है। सेवानिवृत्त पोस्ट मास्टर भगवती प्रसाद डोभाल और एसपी नैथानी का कहना है कि इस अलाउंस से एक बार भी चिकित्सा नहीं करायी जा सकती, जबकि बढ़ती उम्र के साथ आए दिन बीमारियां घेरे रहती हैं और रोगों का इलाज कराना दिन प्रतिदिन महंगा होता जा रहा है। पहाड़ में केन्द्रीय स्वास्थ्य सेवा (सीजीएचएस) की सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं।
अपनी इस समस्या को इन सेवानिवृत्त केन्द्रीय कर्मचारियों ने गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज के माध्यम से प्रधानमंत्री तक अपनी आवाज पहुंचायी है। गढ़वाल सांसद सतपाल महाराज से भी उन्होंने इस मामले को लोकसभा में उठाने का अनुरोध किया है। उनकी मांग है कि मेडिकल अलाउंस को कम से कम प्रतिमाह एक हजार रुपये कर महंगाई भत्ता भी जोड़ा जाए(जागरण,श्रीनगर गढ़वाल,2.10.2010)।
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