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11 अक्टूबर 2010

पंजाब में आरटीआई से खौफजदा आईटीआई

पंजाब का तकनीकी शिक्षा और औद्योगिक प्रशिक्षण विभाग (आईटीआई) सूचना का अधिकार कानून (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी निर्धारित 30 दिनों में तो दूर, चार माह बाद भी नहीं दे सका। चार माह बाद उसे इसका ख्याल आया तो वह इतना खौफजदा हो गया कि जवाब देने के बजाय स्टेट आफिस में विजिट करने को आमंत्रित कर डाला। अब आईटीआई के निदेशक को डर सता रहा है कि तय समय पर जानकारी नहीं देने के कारण राज्य सूचना अधिकारी उन पर जुर्माना न लगा दें। इस संवाददाता ने 9 मई 2010 को विभाग के निदेशक से जानकारी मांगी थी कि राज्यभर में आईटीआई द्वारा पिछले पांच सालों में कितने उपकरण खरीदे? उनके लिए टेंडर कब निकाले? टेंडर में सबसे कम और सबसे अधिक राशि किसने भरी थी? राज्यभर में कितने बच्चों ने आईटीआई में दाखिला लिया? किन-किन सेंटरों में पुरानी मशीनें कितनी कंडम हो चुकी हैं? मांगी गई जानकारी के करीब चार महीने बाद भी विभाग ने कोई जवाब नहीं भेजा। चार माह बाद जब विभाग ने जब आरटीआई आवदेन का ख्याल आया तो उसको अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने संवाददाता को ही बुलावे का पत्र भेज दिया। इतना ही नहीं, अपनी कमी छिपाने के लिए इसके लिए तारीख 20 अक्टूबर, सुबह 11 बजे और स्थान चंडीगढ़ आफिस (स्टेट आफिस) भी मुकर्रर कर दिया। आईटीआई के निदेशक के भेजे पत्र में लिखा है कि किसी भी जानकारी के लिए 20 अक्टूबर को चंडीगढ़ कार्यालय में सुबह 11 बजे आकर जानकारी के साथ निरीक्षण कर सकते हैं। जो भी जानकारी चाहिए, उसकी मौके पर ही फोटोस्टेट कापी दे दी जाएगी। इसके बारे में आरटीआई अवेयरनेस फोरम के चेयरमैन एडवोकेट एसके शर्मा कहते हैं कि आईटीआई ने पहले गलती की। दूसरी गलती यह है कि अगर जानकारी देने के बजाय किसी को अपने आफिस में विजिट के लिए बुलाना हो तो इसके लिए पहले लिखित सूचना देनी होती है कि किस तारीख और कितने समय बुलाना चाहते हैं(रमेश शुक्ला,दैनिक जागरण,अमृतसर,11.10.2010)।

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