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01 अक्टूबर 2010

दसवीं परीक्षा की अंडरटेकिंग बनी मुसीबत

दसवीं बोर्ड की परीक्षा के स्थान पर पहली बार समग्र सतत मूल्यांकन (सीसीई) प्रणाली के तहत होने वाली समेटिव असेसमेंट-2 की परीक्षा अभिभावकों की परेशानी का कारण बनी हुई है। इसका कारण केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) के निर्देशों के तहत स्कूलों की ओर से समेटिव एसेसमेंट-2 के लिए मांगी जा रही अंडरटेकिंग है।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूली बच्चों पर अंडरटेकिंग में बोर्ड परीक्षा देने की सूरत में स्कूल छोड़ कर जाने वाले विकल्प को चुनने के लिए दबाव बना रहे हैं। स्कूलों की इस मनमानी का मामले की गंभीरता को देखते हुए यह मामला मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के दरबार में पहुंच गया है। ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन ने इस बाबत सिब्बल को पत्र लिखकर स्कूलों की शिकायत की और जल्द राहत की मांग भी की है।

अभिभावकों का आरोप है कि स्कूलों की और से इस तरह की अंडरटेकिंग डिजाइन की गई है जिससे पैरेंट्स पर समेटिव मूल्यांकन-2 की परीक्षा के स्थान पर बोर्ड एग्जाम देकर स्कूल छोड़ने का दबाव बनाया जा रहा है। अंडरटेकिंग इस तरह की है जिससे पैरेंट स्कूल छोड़ने वाले विकल्प पर ही हस्ताक्षर करें। उल्लेखनीय है कि सीबीएसई की और से यह जानकारी मांगी गई है कि कौन से बच्चे स्कूल का समेटिव मूल्यांकन-२ देना चाहते हैं और कौन बोर्ड की ओर से आयोजित होने वाली मूल्यांकन परीक्षा।

मालूम हो कि बोर्ड की मूल्यांकन परीक्षा उसी शर्त पर देनी है कि जब बच्च सीबीएसई बोर्ड छोड़ किसी अन्य बोर्ड में आगे की पढ़ाई करना चाहता हो। ऑल इंडिया पैरेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक अग्रवाल ने बताया इस बाबत कपिल सिब्बल को शिकायत की गई है।

उन्होंने कहा कि स्कूल की और से मांगी जा रही अंडरटेकिंग गैरकानूनी है। उन्होंने पत्र में मांग की है कि सीबीएसई के साथ ही स्कूलों को भी ऐसा करने से रोका जाना चाहिए, जिससे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ न हो सके। कोई भी अभिभावक एक बार दाखिला दिलवाने के बाद स्कूल को छुड़वाना नहीं चाहता है(दैनिक भास्कर,दिल्ली,1.10.2010)।

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