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01 अक्टूबर 2010

ग्लोबल सुधार सुस्त, नहीं बढ़ रहे हैं रोजगार

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने भी माना है कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था में सुधार काफी कमजोर और अनिश्चित है। यही वजह है कि रोजगार के ज्यादा अवसर सृजित नहीं हो पाए हैं। आईएमएफ प्रमुख डोमिनिक स्ट्रास काहन ने कहा है कि ग्लोबल अर्थव्यवस्था सुस्त गति से आगे बढ़ रही है। जब तक बेरोजगारी दर कम नहीं होती है यह कहना फिलहाल मुश्किल है कि संकट समाप्त हो गया है। आईएमएफ और विश्व बैंक की अगले सप्ताह होने वाले सालाना बैठक से पहले यहां बातचीत में डोमनिक काहन ने कहा कि वह दुनिया की विशालतम अर्थव्यवस्था अमेरिका के भविष्य के बारे में आशान्वित हैं।

कुछ यूरोपीय देशों की संभावनाएं अनिश्चित
उन्होंने कहा कि एशियाई और लातिन अमेरिकी अर्थव्यवस्थाएं बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं लेकिन कुछ यूरोपीय देशों की संभावनाएं अनिश्चित नजर आ रही हैं। उन्होंने सतर्क किया कि किसी तरह के हस्तक्षेप से कोई उम्मीद करना अच्छा नहीं होगा क्योंकि इतिहास बताता है कि इस तरह का हस्तक्षेप अधिक समय तक नहीं टिकता। आईएमएफ और विश्व बैंक की सालाना बैठक में भारत का प्रतिनिधित्व वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी करेंगे। काहन ने कहा कि सुधार की गति यदि सुरक्षित भी रहती है तब भी यह सवाल तो उठेगा ही कि कितने रोजगार के अवसर सृजित हुए। उन्होंने कहा कि भारत और चीन के अलावा लातिन अमेरिकी देशों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।

बोर्ड में फिलहाल यूरोप का दबदबा
काहन ने कहा कि आईएमएफ बोर्ड में विकासशील देशों को स्थान देना उचित रहेगा। इस बहुराष्ट्रीय संस्थान के बोर्ड में फिलहाल यूरोप का दबदबा बना हुआ है। बहरहाल, कोष के चार्टर में 24 सदस्यीय कार्यकारी बोर्ड में सीट वितरण के बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं है। उन्होंने जोर दिया कि सदस्य देशों को इन मुद्दों को सुलझाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कुछ देश यूरोपीय देशों के कब्जे वाली नौ सीटों को लेना चाहते हैं, क्योंकि विश्व अर्थव्यवस्था में क्षेत्र की भूमिका कमजोर हुई है लेकिन यूरोप के छोटे देश हैं जो अपनी जगह नहीं छोड़ना चाहते हैं। काहन ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि यूरोपीय देश इस मुद्दे पर आपस में विचार विमर्श कर रहे हैं और वह किसी समाधान के साथ आगे आएंगे।

आईएमएफ बोर्ड में भारत का कोटा बढ़ेगा
आईएमएफ प्रमुख डोमिनिक स्ट्रास काहन ने कहा है कि भारतीय अर्थव्यवस्था में बेहतर ढंग से सुधार हो रहा है। आईएमएफ बोर्ड में भारत को ज्यादा कोटा मिलेगा। उन्होंने कहा कि आईएमएफ बोर्ड में भारतीय कोटा अधिक होना चाहिए। उन्हें लगता है कि जो समाधान वे चुनेंगे उससे न केवल भारत का कोटा बढ़ेगा, बल्कि 187 देशों के बीच भारत की रैंकिंग भी बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि कोटा बढ़ाए जाने के बावजूद कुछ लोग यह तर्क दे सकते हैं कि यह बढ़ोतरी पर्याप्त नहीं है। लेकिन कोटा में बदलाव खेल का अंत नहीं है क्योंकि अगले कुछ वर्षों में और एक दौर की समीक्षा होगी(अमर उजाला,दिल्ली,29.9.2010)।

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