स्कूली शिक्षक पर अब सैटेलाइट से नजर रखी जाएगी। इसके लिए राजस्थान माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने 600 करोड़ की परियोजना तैयार की है।
अगर कोई बड़ी अड़चन नहीं आई तो यह प्रणाली अगले सत्र से काम शुरू कर देगी। फिलहाल यह प्रोजेक्ट अजमेर जिले में लागू किया जाएगा। परियोजना के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय और आईटी मंत्रालय से बजट मिल सकता है। बोर्ड के अध्यक्ष सुभार्ष गर्ग ने बताया कि स्कूलों को सैटेलाइट के जरिए जोड़ने से दो तरफा संचार संभव हो सकेगा।
इससे न सिर्फ गैर हाजिर शिक्षकों का पता रहेगा, शिक्षकों की कमी वाले स्कूलों में वीडियो कांफ्रेंस के जरिए पढ़ाई भी होगी। इस काम में सांसद व केंद्रीय सूचना प्रौद्योगिकी राज्यमंत्री सचिन पायलट से भी सांसद निधि में इसके लिए फंडिंग मांगी जाएगी। गर्ग के मुताबिक पूरे प्रदेश के स्कूलों को इस प्रकार सैटेलाइट से जोड़ने के प्रोजेक्ट पर करीब 600 करोड़ रुपये के खर्च का अनुमान है।
शिक्षकों को ट्रेनिंग भी देगा बोर्ड
परीक्षा और मूल्यांकन के दायरे से बाहर निकलते हुए बोर्ड ने शिक्षकों की ट्रेनिंग के क्षेत्र में कदम करने का फैसला भी किया है। बोर्ड जल्द ही माध्यमिक शिक्षकों के लिए अजमेर में एकेडमिक स्टाफ कॉलेज खोलेगा। बोर्ड अध्यक्ष गर्ग के मुताबिक कई शिक्षा बोर्ड केंद्र व राज्य सरकारों से मांग कर रहे हैं कि उन्हें अध्यापकों की ट्रेनिंग की जिम्मेदारी भी सौंपी जाए। फिलहाल बोर्ड अपने संस्थानों से यह काम शुरू करने जा रहा है।
हाजिरी और पढ़ाई की मॉनिटरिंग
राज्य भर में लंबे समय से यह शिकायत चल रही है कि शिक्षक स्कूलों में समय से नहीं आते हैं। कुछ जगहों से अपने पदों को सबलेट करने की शिकायतें भी सरकार को मिलती रहती हैं।
बोर्ड सैटेलाइट के जरिए सुनिश्चित करेगा कि किस स्कूल में कौनसा शिक्षक किस समय आया है और कौनसा नहीं। सैटेलाइट शिक्षकों की हाजिरी की ही नहीं, कक्षा में हर रोज पढ़ाए जाने वाली सामग्री के कंटेंट की मॉनिटरिंग भी करेगा। बोर्ड फिलहाल बड़े पैमाने पर परीक्षा केंद्रों की वीडियोग्राफी करा रहा है।
ऐसे काम करेगा
30-40 स्कूलों के कलस्टर पर एक स्टूडियो बनाया जाएगा। यह एक ओर सैटेलाइट से जुड़ा होगा तो दूसरी ओर स्कूलों से।
स्टूडियो से स्कूलों को पाठ्य सामग्री भेजने, वीडियो कांफ्रेंसिंग और शिक्षकों की मॉनिटरिंग का काम होगा।
स्कूलों में एलसीडी या एलईडी स्क्रीन, सीसीटीवी लगे होंगे तथा मोबाइल कनेक्टिविटी रहेगी।
स्टूडियो से स्कूलों में शिक्षकों से बातचीत हो सकेगी। यह भी देखा जा सकेगा कि स्कूल में कौन है और कौन नहीं। क्या काम हो रहा है।
इस प्रणाली के समन्वय के लिए किसी एक शिक्षक को ट्रेनिंग दी जाएगी(दैनिक भास्कर,जयपुर,16.10.2010)।
यह एक अच्छी पहल है। बहुत अच्छी प्रस्तुति।
जवाब देंहटाएंसर्वस्वरूपे सर्वेशे सर्वशक्तिसमन्विते।
भयेभ्यस्त्राहि नो देवि दुर्गे देवि नमोsस्तु ते॥
महानवमी के पावन अवसर पर आपको और आपके परिवार के सभी सदस्यों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई!
चिठियाना-टिपियाना संवाद