मिरगी के कारण ड्यूटी से छह दिन, एक घंटा व 12 मिनट गायब रहने के चलते बर्खास्त किए गए दिल्ली पुलिस कर्मी को हाईकोर्ट ने राहत प्रदान कर दी है। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार को निर्देश दिया है कि सितंबर, 1996 से उसकी स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति की मांग को स्वीकार करते हुए उसे सेवानिवृत किया जाए। नियमों के अनुसार उसे सेवानिवृति के सारे लाभ भी दिए जाएं। दिल्ली पुलिस में कार्यरत एक कर्मी हरि किशन दहिया को पहले तो बीमारी के चलते स्वेच्छिक सेवानिवृति देने से मना कर दिया गया और बाद में उसे नौकरी से गायब रहने के मामले में बर्खास्त कर दिया गया। इस आदेश को उसने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। न्यायमूर्ति प्रदीप नंदराजोग व न्यायमूर्ति मूलचंद गर्ग की खंडपीठ ने कहा कि जो व्यक्ति अपनी ड्यूटी करने की स्थिति में न हो हम उसे फिर से ड्यूटी करने के लिए नहीं भेज सकते हैं। खंडपीठ ने कहा कि यह बात आम धारणा के विपरीत होगी कि जो व्यक्ति मिरगी जैसी बीमारी से पीडि़त हो, उससे यह आशा की जाए कि वह पुलिसकर्मी जैसी नौकरी कर पाएगा। ऐसी नौकरी में हमेशा चौंकना रहना और शारीरिक रूप से स्वस्थ होना जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलो में मात्र छह दिन, एक घंटा व 12 मिनट नौकरी से गायब रहने के आधार पर किसी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करके उसे बर्खास्त करना ठीक नहीं था। खंडपीठ ने कहा कि सबसे हैरानी की बात यह है कि जो व्यक्ति 28 साल नौकरी कर चुका है और बीमारी के चलते सेवानिवृति मांग रहा है, बिना ठोस कारण बताए उसकी मांग को अस्वीकार कितना जायज था, जबकि नियमों के अनुसार वह सेवानिवृति मांग सकता था। न ही विभाग यह बता पाया कि उसने किस कारण उसकी मांग को अस्वीकार किया। हरि किशन दहिया नवंबर, 1968 में दिल्ली पुलिस में बतौर कांस्टेबल भर्ती हुआ था। वह मिरगी की बीमारी से पीडि़त था। सितंबर, 1996 में स्वेच्छिक सेवानिवृति मांगी पंरतु उसकी मांग अस्वीकार कर दी गई। बाद में उसे ड्यूटी से गायब रहने के मामले में सितंबर, 1998 में बर्खास्त कर दिया गया(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,16.10.2010)।
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