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11 अक्टूबर 2010

कंपनियों में पदों के क्रिएटिव नाम रखने का चलन

सीईओ, सीएफओ, मैनेजर और कंसल्टेंट ये पद अब पुराने हो गए हैं। कंपनियां अपने स्टाफ और सीनियर अधिकारियों के पदों के लिए क्रिएटिव नामों की तलाश कर रही हैं। विभागों के खास नाम से लेकर अधिकारियों को ऐसे पद दिए जा रहे हैं जो लोगों में उत्सुकता भी पैदा करें और उनके काम को पूरी तरह बयान भी कर दें। जानें ऐसे कुछ नए पदों के बारे में
मैं एक चीफ मॉल मैकेनिक  हूं
सुशील डुंगरवाल, मुंबई स्थित बियॉन्ड स्क्वेयरफीट एडवाइजरी प्राइवेट लि.(एक मॉल एडवाइजरी कंपनी) के संस्थापक 
मैं चाहता तो खुद को सीईओ कह सकता था, पर उस समय मैं भी दूसरों की तरह भीड़ में शामिल हो जाता। यह पद बहुत प्रभावी है और इससे स्पष्ट तौर पर यह पता चलता है कि मैं क्या काम करता हूं। मैकेनिक के पास आप चीजें ठीक कराने जाते हैं।
शुरुआत में जब मैंने यह कंपनी के कुछ सदस्यों के साथ इस पद की चर्चा की तो उन्होंने विरोध किया। मुझे काफी समझाना पड़ा कि यह नाम मेरे काम को कितने सही तरीके से जाहिर करता है। एक बार हमारा रिटेल सेमिनार था और हम सभी को अपने नए विजिटिंग कार्ड के लिए बेहद सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। अब कंपनी में प्रत्येक व्यक्ति इस प्रत्यय को जोड़ना चाहता था। रचनात्मकता आधारित हमारे व्यवसाय के लिए इससे बेहतर प्रगतिशील और मौलिक नाम और क्या हो सकते थे।
मेरा असली कार्य : ऐसे नए तरीके खोजना, जिससे मॉल्स को अधिक आकर्षक बनाया जा सके।
मैं चीफ लर्निग ऑफिसर हूं
अभिजीत भादुड़ी, विप्रो, बेंगलुरू 
क्या इतने वर्षो बाद अभी तक तुम नहीं सीखे? ऐसा लोग मुझसे पूछते हैं जब मैं उन्हें अपने पद के बारे में बताता हूं। मेरा उत्तर होता है, यहां इतना कुछ है सीखने के लिए कि मैं अभी तक सीख रहा हूं। मेरी भूमिका बिजनेस परिवेश का आकलन और नियंत्रण करना, विप्रो की कार्यनीति को आगे बढ़ाने वाले निर्णयों में भागीदारी और विस्तार की योजना में सभी स्तरों पर भावी नेतृत्व क्षमता का विकास करना।
चीफ लर्निग ऑफिसर को विकास के संभावित विकल्पों में संगठन के लिए लीडर्स खोजना और उनका विकास करने का काम करना पड़ता है। इस कार्य में नौकरी के अवसर पैदा करना, संगठन के मुताबिक लोगों को काम सिखाना और प्रशिक्षण व लीडरशिप विकसित करने के लिए विभिन्न तरीके विकसित करने का कार्य शामिल है।

कंपनी का मानना है कि वे खुद को फ्यूचर प्रूफ बना सके। सीएलओ नियोजित या अनियोजित, औपचारिक या अनौपचारिक, व्यक्तिगत या समूह-आधारित किसी भी तरीके से लर्निग की निरंतरता बनाए रखने के लिए विभिन्न तरीकों का आकलन और उन्हें लागू करता है।
मेरा असली कार्य : कंपनी के लिए भावी लीडर्स तैयार करना।
मैं एक चीफ ट्रैफिकर हूं
सुरेश सरोज, गेम्स2विन इंडिया प्राइवेट लि., मुबंई 
मैं गेम्स2विन का सारा ट्रैफिक नियंत्रित करता हूं। लगभग 2 करोड़ संदेशों को एक माह में नियमित तौर पर सही जगह (गेम्स और वेबसाइट) पर प्रेषित करना होता है। गेम्सटूविन नामक यह वेबसाइट लगभग 20 देशों में संचालित की जाती है, इस आधार पर कि उन देशों में कौन से खेल बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
ऐसा chimpoo.com और gangofgamers.com आदि के साथ भी ऐसा ही है। इसके साथ लोगों की क्लिकिंग के आधार पर विज्ञापन को भी बदलना पड़ता है। सभी साइट्स 20 भाषा में चल रही हैं - ऐसे में सही व्यक्ति को सही जगह भेजना पड़ता है। अमेरिकी उपभोक्ताओं को मेरा पद उत्सुकता पैदा करता है। मैं वास्तव में क्या काम करता हूं यह जानने के लिए लोग मेरे साथ अधिक समय व्यतीत करते हैं। 
मेरा असली कार्य : यह सुनिश्चित करना कि गेम्स2विन की सभी साइट्स सही तरह से काम करती रहें।
मैं सीरियल एंटरप्रिन्योर हूं
आलोक केजरीवाल, विन ग्रुप, मुबंई
मैं एक विचार के आधार पर बिजनेस प्लान बनाता हूं, फिर उस बिजनेस प्लान की सेटिंग के लिए टीम बनाता हूं, पूंजी की व्यवस्था करने के संबंध में बातचीत करता हूं, कार्य संचालन करता हूं, उसकी मार्केट वैल्यू बनाता हूं और फिर कंपनी को बेच देता हूं। इसके बाद मैं फिर से एक नए विचार पर काम करना शुरू कर देता हूं, बिल्कुल एक सीरियल किलर की तरह! मैं पांच कंपनी शुरू कर चुका हूं, जिसमें से दो बेच दी हैं।
इस काम में मेरे सबसे बड़े सहयोगी होते हैं वेंचर कैपिटलिस्ट और बैंक। मेरी 150 सदस्यों की टीम है और मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरू के अलावा विदेशों में न्यूयॉर्क और सेन फ्रांसिस्को में हमारा काम चलता है। सीरियल एंटरप्रिन्योर शब्द सिलिकॉन वैली से आया है, यहां बिजनेस खरीदा और बेचा जाता है। यदि मैं किसी बिजनेस को लंबे समय तक अपने पास रखता हूं तो इसका मतलब है कि मैं इसकी कीमत कम कर रहा हूं। यह रिले दौड़ की तरह है, यदि आप सही समय पर यानी पहले सौ मीटर के बाद दूसरे व्यक्ति को रिले नहीं सौंपता तो मैं दौड़ से बाहर हो जाऊंगा।
मेरा असली कार्य : कंपनी बनाना और बेचना।
मैं चीफ बिलीफ ऑफिसर हूं
देवदत्त पटनायक, फ्यूचर ग्रुप, मुबंई 
यह पद एक सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार बिजनेस इस बात पर निर्भर करता है कि लोग कैसा व्यवहार करते हैं और व्यवहार उनके विश्वास पर आधारित होता है। मैं लोगों के विश्वास को तलाशता हूं और उसे विस्तार देते हुए यह समझने की कोशिश करता हूं कि लोग कोई कार्य क्यों करते हैं। इसके तहत कहानियां और पौराणिक कथाओं का अध्ययन करता हूं।
ग्राहक कैसे व्यवहार करेगा इसके लिए उनके परिवेश को समझना भी जरूरी है-जनमानस की मान्यताओं को समझना पड़ता है। इसके लिए माइथोलॉजिस्ट के तौर पर मेरी पृष्ठभूमि मेरे काम को अधिक आसान बना देती है। इससे मुझे भारतीय सोच और अन्य संस्कृतियों से इसे क्या चीज अलग करती है यह समझने में मदद मिलती है। मैं अपना समय नेताओं से बातचीत करने में व्यतीत करता हूं और किसी नए परिदृश्य में स्थिति का अवलोकन करते उनकी सोच को व्यापक करने के लिए लीडरशिप कोच का काम भी करता हूं, जिससे वे अपनी समस्याओं का समाधान कर सकें और अधिक बेहतर निर्णय ले सकें।
मेरा असली कार्य : यह ढूंढ़ना कि भारतीय लोगों को कैसे अधिक खरीदारी के लिए प्रेरित किया जाए।
मैं एक गार्डनर हूं
सुब्रतो बाग्ची, माइंडट्री कंसल्टिंग, बंगलौर
माइंडट्री के संदर्भ में ‘गार्डनर’ जैसे अनोखे विचार को अपनाने का आधार उसकी प्रतीकात्मक स्वरूप और मजबूत कथ्य रहा। प्रतीकात्मक रूप इसलिए क्योंकि एक विशेष स्तर तक इसके शीर्षक आपके ऊपर असर नहीं डालते। जैसे मैं यह संदेश अपने लीडरों तक पहुंचा रहा हूं। माइंडट्री में मेरे भावी वर्ष अपने चुनिंदा लीडरों और अभ्यास को मजबूत करना होगा।
जब हम इस तरह के वैकल्पिक शीर्षकों की तलाश कर रहे थे तो ऐसे समय हमें कई कारणों से गार्डनर पसंद आया था। यह नाम ही मेरे कार्य का विवरण देने का सबसे बेहतर स्नोत बना। मसलन, एक गार्डनर को लीजिए। बगीचे में वह उसका कार्य बेहद जरूरी है। उसे अपना कार्य पसंद है। बगीचे के हरेक पौधे के साथ उसका नैसर्गिक संबंध है। बगीचा किस भी आकार का हो, लोग उसे देखने आते हैं, लेकिन कोई उस बागवान को नहीं देखता, लेकिन उसे इसका कोई मलाल नहीं होता।
मेरा असली कार्य : प्रतिभा की पहचान, उसे तराशना।
मैं एक ग्रोथ कैटालिस्ट हूं
अशोक जैन, एलिया ग्रुप (प्रिंट एंड पैकेजिंग, प्री-मीडिया सर्विसेज कंपनी), मुंबई
सीएफओ के कार्य के अतिरिक्त, संगठन में मेरा प्रमुख कार्य उसे व्यावसायिक, वित्तीय और नीतिगत दृष्टि से मजबूती देना है। इसीलिए यह मेरा पद है। मुझसे इसके बारे में लगातार पूछा जाता है और इस पर विमर्श भी होता है। मैंने एक नए स्टार्टअप - इंडिया कैपिटल एडवाइजर्स की भी देखरेख की है और बतौर ग्रोथ कैटालिस्ट भी मैं कार्य करता हूं। ग्रोथ कैटालिस्ट नाम से लगता है कि जैसे वह अनेक परियोजनाओं में प्राण फूंकने का ही काम करता हो। उसका यह भी पता करना है कि एक संयुक्त और ढांचागत विकास कैसे प्राप्त किया जा सकता है।
मेरा असली कार्य : कंपनी के लिए ऐसी नीतियां तैयार करना जिससे वह तेज रफ्तार से विकास करे।
मैं हूं चीफ नट ऑफिसर
चिराग पटेल, नेट4नट्स (एक मोबाइल वैल्यू-एडेड सर्विस प्रोवाइडर), अहमदाबाद
चूंकि कंपनी का नाम ही नेट4नट्स है, इसलिए इस व्यवसाय में उतरने वाले को कुछ नट्स (पागल) ही होना होगा, और यही वजह है कि इसके प्रमुख को चीफ नट कहा जाता है। यह रोचक और जल्द जुबान पर चढ़ने वाला है।
लोगों की कुछ मजेदार प्रतिक्रियाएं भी मिली हैं। मैं इस पद के आधार पर कई लोगों से भी मिला हूं। कुछ अन्य नट्स फर्म्स भी हैं जैसे टेक नट, बिजनेस नट आदि। हमारे कंप्यूटरों को भी नट्स ही कहा जाता है! हमारे सर्वर का नाम भी नटशेल है। कुछ वर्ष पूर्व, हमारे एक वेंचर कैपिटलिस्ट ने कहा था कि हमें सीईओ जैसे पदों के साथ कॉर्पोरेट समाज के बराबर पहुंचना होगा। इसलिए अब मेरे कार्ड पर सीईओ तो लिखा ही है, लेकिन हरेक बैठक में मैं अपना पुराना पद भी बताता हूं।
मेरा असली कार्य : संस्थान के भीतर और बाहर उसकी केंद्रीय नीति के आधार पर व्यवसाय की देखरेख।
(सुलेखा नायर,हिंदुस्तान,दिल्ली,4.10.2010)

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