आरएएस [प्री] परीक्षा में किए गए आवेदनों में फर्जीवाडा साबित हो गया है। राजस्थान लोक सेवा आयोग [आरपीएससी] की सिफारिश पर राज्य पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप [एसओजी] की प्रारम्भिक जांच में यह खुलासा हुआ है। जिन 55 आवेदनों पर आरपीएससी ने संदेह जताते हुए जांच की अनुशंसा की थी, उनमें से छह पर झालावाड जिले के चुरैलिया गांव का पता था।
गत दिनों एसओजी टीम ने घाटोली थाना इलाके के इस ग्राम पंचायत मुख्यालय पर जाकर जांच की तो सामने आया कि इन छहों में से एक भी वहां नहीं रहता। इस गांव के पते पर दो युवतियों और चार युवकों ने आवेदन किए थे। गांव में इन्हें किसी ने भी नहीं पहचाना और स्पष्ट कहा कि इस नाम के युवक-युवती न तो वर्तमान में यहां रहते और न ही कभी रहे हैं।
हरकत में आया मुख्यालय
प्रारम्भिक जांच में फर्जीवाडा प्रमाणित होने के बाद एसओजी मुख्यालय ने इस मामले में गहन छानबीन शुरू कर दी है। पूरे प्रदेश में उन 'नटवरलालों' की तलाश प्रारंभ कर दी गई है, जिनके इन आवेदनों पर फोटो लगे हैं।
सूत्रों ने बताया कि छहों आवेदनों की हस्तलिपि और स्याहीएक जैसी नजर आती है। सभी आवेदन जनजाति वर्ग से किए गए हैं और सभी ने प्रारम्भिक व मुख्य परीक्षा में विषय इतिहास व लोक प्रशासन मांगे हैं।
इन नामों से किए आवेदन
सूत्रों ने बताया कि मीना पुत्री मानसिंह, निर्मल सिंह पुत्र नेमीचंद, हेमंत पुत्र हरीश, चरणसिंह पुत्र चेतराम, क्यून पुत्री कमलराम व सुनील कुमार पुत्र सुरेशचंद के नाम से ये छह आवेदन किए गए थे। सभी के पतों में सिर्फ चुरैलिया [झालावाड] लिखा है। किसी मोहल्ले या गली का कोई उल्लेख नहीं है।
जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई
फर्जी आवेदनों के मामले में फिलहाल एसओजी की रिपोर्ट नहीं मिली है। फर्जीवाडा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
के.के. पाठक, सचिव,
आरपीएससी, अजमेर
(आशीष जैन,राजस्थान पत्रिका,कोटा,1.10.2010)
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