शिक्षकों की कमी से बेहाल प्रदेश के राजकीय व अनुदानित स्नातक-परास्नातक कालेजों को शासन ने भी तगड़ा झटका दिया है। इन कालेजों में नए स्थाई शिक्षकों की तैनाती शीघ्र होने की संभावना नहीं है। सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर रखने का मामला भी अभी वित्त विभाग में लटका पड़ा है। इन सबके बीच मानदेय पर अतिथि शिक्षकों की तैनाती पर भी रोक लगा दी गई है। इस सत्र में अब तक किसी के भी मानदेय स्वीकृत नहीं किए गए हैं। अधिकारीगण इस मसले पर खामोश हैं। दूसरी ओर उच्च न्यायालय ने पूरी स्थिति पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए विभाग को इस मसले पर तत्काल निर्णय लेने के निर्देश दिए हैं। प्रदेश में राजकीय व अनुदानित डिग्री व पीजी कालेजों में शिक्षकों की तैनाती के सभी रास्ते फिलहाल अधर में लटके हैं। अनुदानित कालेजों के लिए शिक्षकों के चयन का जिम्मा उच्चतर शिक्षा चयन आयोग के पास है। नियमत: सालाना रिक्त पदों का विवरण लेकर हर साल चयन होना चाहिए, पर ऐसा नहीं हो रहा है। आरक्षण व अन्य समस्याओं को लेकर न्यायालयों में चल रहे विभिन्न वादों के चलते इन शिक्षकों के चयन की प्रक्रिया तीन-चार साल पीछे चल रही है। राजकीय कालेजों के शिक्षकों का चयन लोक सेवा आयोग के पास है। यहां भी चयन की प्रक्रिया अभी चल रही है। शिक्षकों की भारी कमी से दो चार कालेज प्रबंधन मानदेय पर अतिथि शिक्षक रख कर किसी तरह काम चला रहे थे। इस साल उच्च शिक्षा विभाग ने यह व्यवस्था भी बंद कर दी है। विभागीय अधिकारियों की माने तो इस संबंध में कोई नया आदेश नहीं जारी किया गया है। कई पुराने शासनादेशों के आधार पर मानदेय की स्वीकृति रोक दी गई है। इस सत्र में अभी तक कोई स्वीकृति जारी नहीं की गई है। मामला अब उच्च न्यायालय तक भी पहुंच चुका है। न्यायमूर्ति शिव कुमार सिंह व न्यायमूर्ति सभाजीत यादव की डबल बेंच ने हाल ही में जारी आदेश में उच्च शिक्षा विभाग को मानदेय स्वीकृत करने के मसले पर तत्काल निर्णय लेने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में उच्च शिक्षा विभाग द्वारा राजकीय कालेजों से सेवानिवृत्त शिक्षकों को मानदेय पर तैनात करने का प्रस्ताव भी अटका पड़ा है। उच्च शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. मियां जान के अनुसार वित्त विभाग को अनुमोदन का इंतजार है(एल एन त्रिपाठी ,दैनिक जागरण,इलाहाबाद,१७.१०.२०१०)।
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