पत्राचार एवं सतत शिक्षण संस्थान का इलाहाबाद विश्वविद्यालय में विलय करने के लिए संभावनाओं पर मंथन जारी है। पिछले दिनों डीन कला संकाय प्रो. एमपी दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक के दौरान कहा गया कि आर्थिक, शैक्षिक और प्रबंधकीय पक्ष पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। अब तक जितने प्रारूप बने हैं उन्हें भी कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करने पर चर्चा हुई। फिलहाल अभी बात फाइलों तक ही सिमटी हुई है। इस संबंध में संभावनाओं की तलाश के लिए बनाई गई कमेटी का कहना है कि उक्त तीनों पक्षों पर अध्ययन के बाद ही आगे की रणनीति तय की जाएगी।कमेटी यह भी देखेगी कि इस विलय के बाद विश्वविद्यालय पर कितना आर्थिक बोझ पड़ रहा है। साथ ही किसी अन्य प्रकार से शिक्षण संबंधी गतिविधि पर दुष्प्रभाव तो नहीं पड़ रहा है। कमेटी का यह भी कहना है कि पत्राचार संस्थान में शैक्षिक गतिविधि स्तरीय हो, इसका ध्यान रखा जाएगा। वर्तमान में संस्थान से सम्बद्ध कर्मचारियों के हितों का भी ध्यान रखने की बात कही जा रही है। संस्थान के निदेशक प्रो. बीएन मिश्र का कहना है कि जब तक इस संबंध में कमेटी अपनी रिपोर्ट नहीं रखती, कुलपति और यूजीसी उसे मंजूरी नहीं देते, तब तक मामला अधर में है। पाठ्यक्रम वितरण आदि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि शीघ्र ही पाठ्य सामग्री की व्यवस्था कर छात्रों में बांट दी जाएगी। यह भी कहा कि अभी प्रवेश प्रक्रिया जारी है जो छात्र किन्हीं कारणों से प्रवेश नहीं ले सके हैं वे संस्थान की शर्तो को पूरा कर पंजीयन करा सकते हैं। उक्त प्रकरण पर डिप्टी रजिस्ट्रार आरएल विश्वकर्मा ने बताया कि संस्थान के निदेश को पत्र लिखकर पूर्व में तैयार किये गये आंकड़ों को मांगा जा रहा है जिससे आगे की कार्रवाई पूरी हो सके(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,9.10.2010)।
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