बिहार में अगली सरकार किसकी इसपर सहारा न्यूज़ नेटवर्क द्वारा कराए सर्वेक्षण में 59.7 फीसद लोगों ने माना है बिहार में शिक्षा का स्तर सुधरा है।
राज्य में शिक्षा की सुविधाओं के सवाल पर सरकार को 59.7 फीसदी अंक मिले हैं। यानी शिक्षा के मोर्चे पर नीतीश सरकार बहुत महीन फासले से फर्स्ट डिवीजन से चूक गई है. सरकार को सेकेंड क्लास का सबसे उम्दा नंबर मिला है. 40.30 फीसदी लोग शिक्षा की सुविधाओं से खुश नहीं हैं।
इस मुद्दे पर लोगों से दो सवाल किए गए।
स्कूल कॉलेजों में पढ़ाई का स्तर कैसा है, शिक्षक पढ़ाते हैं
पहला सवाल था कि मौजूदा सरकार में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने के लिए स्कूल-कालेजों में पढ़ाई का स्तर कैसा है ? क्या राज्य से विद्यार्थियों का पलायन कम हुआ है ?
क्या स्कूल कालेजों में टीचर अपना कार्य सुचारु रूप से देखते हैं ? क्या सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर सुधरा है ?
इन सभी सवालों को ध्यान रखते हुए जो जवाब आए उनमें से 55 फीसद लोगों ने माना कि राज्य में शिक्षा का स्तर पहले से बेहतर हुआ है। बच्चे शिक्षा की ओर उन्मुख हुए हैं। गरीब भी अपने बच्चों को स्कूल भेज पा रहे हैं। साथ ही शिक्षा की गुणवत्ता में गुणात्मक असर आया है।
अब स्कूल कालेजों में शिक्षक नियमित रूप से पढ़ाते हैं और विद्यार्थियों को इसका खासा लाभ मिल रहा है। राज्य के बच्चों के उत्तीर्ण होने का फीसद भी बढ़ा है।
वहीं इस सवाल के जवाब में 45 फीसद जनता ने इसे नकारा है। जनता का मानना है कि शिक्षा का स्तर जस का तस है। शिक्षा में कोई बड़ा परिवर्तन नहीं आया है।
राज्य में शिक्षा का स्तर
दूसरा सवाल जो जनता से जानने की कोशिश की गयी, वह है राज्य में शिक्षा का स्तर कैसा है ? क्या राज्य के स्कूल कालेजों में दी जा रही शिक्षा से विद्यार्थियों को कम्पटीशन में आसानी मिलती है ? क्या राज्य की शिक्षा रोजगारपरक है ?
क्या राज्य में दी जा रही शिक्षा बच्चों के सर्वांगीण विकास में मददगार है ? इन सवालों के जवाब में 64 फीसद लोगों ने शिक्षा के स्तर को सही ठहराया है।
उनका मानना है कि पिछली लालू यादव और राबड़ी सरकार में जो शिक्षा का स्तर था उसमें पूरी तरह से अब सुधार आया है। वहीं 36 फीसद लोगों ने इस सवाल पर अपनी नकारात्मक प्रतिक्रिया जताई है।
हालांकि हमारे चैनल ने जब लालू से सीधे वार्ता कर इस सवाल का जवाब जानना चाहा तो उन्होंने नीतीश सरकार को पूरी तरह से नकारते हुए अपने को जायज ठहराया।
उन्होंने कहा कि अब बिहार में शिक्षा में अपराधीकरण बढ़ा है। शिक्षा का स्तर गिरा है। विद्यार्थियों को प्रताड़ित किया गया और राज्य से विद्यार्थियों का दूसरे राज्यों में पलायन बढ़ा है।
उन्होंने पूरी तरह से चुनावी भाषण के रूप में अपनी बात रखी। और मौजूदा सरकार के सभी कार्यों को पूरी तरह से गलत ठहराया।
आर्थिक मामलों के विशेषज्ञ एम. चौधरी ने कहा कि राज्य में शिक्षा का स्तर ध्वस्त है।
वरिष्ठ पत्रकार टी.रामचंद्रन ने कहा कि उच्च शिक्षा के बिहार से पलायन बड़ा है।
कितनी खरी उतरी नीतीश सरकार ?
लालू प्रसाद यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में शिक्षा का स्तर चौपट है। बिहार में प्रोफेसरों को अपमानित किया जा रहा है।
तमाम शिक्षकों को संविदा पर रखा गया और उन्हें उसका भुगतान नहीं किया गया जब जब भी शिक्षकों ने अपनी फरियाद की है तो उन्हें लाठियां खाने को मिलती हैं।
वरिष्ठ पत्रकार आनंद प्रधान ने कहा कि बिहार में कवालिटी शिक्षा का स्तर गिरा है। उच्च शिक्षा में कोई निवेश नहीं किया गया है कोचिंगों ने सिवाय छात्रों को लूटने का काम किया है।
वहीं बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सीपी ठाकुर ने बचाव करते हुए कहा कि बिहार में उच्च शिक्षा को लेकर काफी चीजें चल रही हैं और बेहतर होंगी स्थितियां। स्कूल एजुकेशन भी प्रदेश में बेहतर है(राष्ट्रीय सहारा,16.10.2010)।
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