सात समंदर पार से विदेशी मेहमान भारत में अध्यात्म और संस्कृति का ज्ञान लेने आते हैं, लेकिन उत्तराखंड के दुर्गम क्षेत्र के प्राथमिक विद्यालयों में इन दिनों विदेशियों का जत्था बच्चों को शिक्षा दे रहा है। इन विदेशी शिक्षकों की जिज्ञासा इस बात को लेकर भी है कि विषम भौगोलिक परिस्थितियों में रहने के बावजूद बच्चे अपने संस्कारों से कैसे जुड़े रहते हैं। अमेरिका, इजरायल और इंग्लैंड से आया यहूदियों का पंद्रह सदस्यीय दल कुछ दिन पहले तीर्थनगरी घूमने आया। मुनिकीरेती, लक्ष्मण झूला और स्वर्गाश्रम में कुछ समय बिताने के बाद ये विदेशी यमकेश्वर प्रखंड के मराल, भादसी, खैरगल, कैमाल, बढल गांवों में जा पहुंचे। ये विदेशी प्राथमिक विद्यालयों में अध्ययनरत बच्चों के बीच रहकर यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद बच्चे अपनी जड़ों से कैसे जुड़े हुए हैं। इसके लिए वे बच्चों को अंग्रेजी बोलना सिखा रहे हैं। उनके साथ खेल रहे हैं। इतना ही नहीं, चित्रों के माध्यम से ज्ञान देने की कोशिश कर रहे हैं। मेहमान शिक्षक बच्चों को जूते और खेल सामग्री मुहैया करा रहे हैं। इजरायल से आए पर्यटक ब्रेडली कोहेन, रॉनी, अमेरिका की सिमॉन ने बताया कि वे कुछ साल पहले भारत घूमने आए थे। उन्हें यहां के लोग और संस्कृति इतनी भायी कि वे हर वर्ष यहां आने लगे। उन्हें सबसे अधिक प्रभावित यहां के बच्चों ने किया है, जो विपरीत परिस्थितियों के बाद भी अपने माता-पिता और परिवार का साथ देने के लिए तैयार रहते हैं, जबकि पश्चिमी देशों में बच्चे वयस्क होते ही माता-पिता को छोड़ देते हैं। उन्होंने कहा, वे भारतीय परंपराओं के कायल हैं। बीते कई सालों से वे लगातार ऋषिकेश आ रहे हैं और अपने अन्य साथियों को भी यहां आने के लिए प्रेरित करते हैं। उन्हें यहां से जो प्यार मिला, वे उसे बयां नहीं कर सकते। इस प्यार के बदले वे भी यहां के लोगों को कुछ लौटाना चाहते हैं। इसलिए उन्होंने यहां अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर एक समूह बनाया है और वे आसपास के स्कूलों में जाकर बच्चों से मिलते हैं। इससे उनके पर्यटन का उद्देश्य तो पूरा हो ही रहा है, ग्रामीण भारत के स्वरूप को भी जानने का मौका मिल रहा है। भादसी प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक त्रिवेंद्र सैनी ने बताया कि विदेशी पर्यटकों के साथ स्कूल के बच्चे भी सहज महसूस कर रहे हैं। उन्हें पढ़ाई के साथ नया सीखने को मिल रहा है(दीपक पुरोहित,दैनिक जागरण,ऋषिकेश,17.10.2010)।
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