इस बार कालेज प्रशासन जरा सख्त हुआ तो बैंकड्राफ्ट का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया लेकिन डीएवी कालेज का पूर्व प्रशासन इस फर्जीवाड़े के लिए कुछ कम जिम्मेदार नहीं है। आलम यह है कि रद्दी की टोकरी में फर्जी बैंकड्राफ्टों के अंबार लगे हुए हैं। ये ड्राफ्ट अरसे से छात्रों को प्रवेश दिलाने में इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। हैरत की बात यह है कि कालेज प्रशासन ने रिपोर्ट दर्ज कराना तो दूर, न तो प्रबंधन को इस बाबत कोई जानकारी दी, न ही कार्रवाई की। इस तरह से शातिर छात्र नेताओं और स्टाफ की मिलीभगत से कॉलेज को इस तरीके से लाखों रुपये का चूना लगाया जाता रहा। अब प्रबंधन ने आडिट कराने का फैसला किया है। इससे लाखों का घपला सामने आने की उम्मीद है।
डीएवी पीजी कालेज में फर्जीवाड़े का काम वर्षों से जारी है। कभी बैंक ड्राफ्ट स्कैन करके तो कभी फर्जी वाउचर के जरिए। इस बार तो छात्रनेताओं ने नायाब तरीका अपनाया। बैंक ड्राफ्ट बनवाए और फिर उसे कैंसल करा लिए। हालात को देखते हुए दयानंद शिक्षण संस्थान के महामंत्री ने कालेज में स्पेशल ऑडिट कराने का फैसला लिया है।
महर्षि दयानंद शिक्षण संस्था को डीएवी पीजी कालेज के कई छात्रनेता स्टाफ से मिलकर इसे कलंकित करने में लगे हुए हैं। अभी हाल में एक छात्रनेता द्वारा गलत मकसद से १०० बैंक ड्राफ्ट बनवाने और फिर उसे कैंसल करने का मामला सामने आया है। दरअसल ऐसी कारगुजारी वर्षों से चली आ रही है। लेकिन मामला डॉ. बीएल नौटियाल के प्राचार्य बनने के बाद सामने आ रहा है। कालेज सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पूर्व प्राचार्यों के समय में छात्रनेताओं द्वारा सैकड़ों की संख्या में बैंक ड्राफ्ट के जरिये फर्जीवाड़े हुए हैं। बैंक से फर्जी घोषित हो चुके ड्राफ्ट कालेज के कबाड़ की शोभा बढ़ा रहे हैं। हैरत की बात यह है कि न तो कालेज प्रशासन ने कभी इसकी पड़ताल नहीं की। यही नहीं, पूर्व प्राचार्यों द्वारा इस संबंध में प्रबंधन को सूचित भी नहीं किया गया। दयानंद शिक्षण संस्थान के महामंत्री जगेंद्र स्वरूप ने कालेज में स्पेशल ऑडिट कराने का फैसला लेते हुए कहा कि ऑडिट के तत्काल बाद फर्जीवाड़े के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। साथ ही उन्होंने बताया कि उन्होंने प्राचार्य डॉ. नौटियाल को ९१ बैंक ड्राफ्ट के आरोपियों के खिलाफ जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज कराने को कहा है(अमर उजाला,देहरादून,16.10.2010)।
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