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09 अक्टूबर 2010

मध्यप्रदेशःसेवा गारंटी कानून आज से लागू। मुख्यमंत्री भी दायरे में

मप्र में कल शनिवार से एक नया कानून लागू होने जा रहा है, जिसके तहत आम आदमी के कुछ जरूरी कामों को समयसीमा में बांध दिया गया है। यानी किसानों को खसरा-खतौनी की नकल यदि पाँच दिन में नहीं मिली तो विलम्ब के लिए जिम्मेदार कर्मचारी से रोजाना ढाई सौ रूपए के हिसाब से जुर्माना वसूला जाएगा। फिलहाल नौ विभागों और बिजली-पानी समेत छब्बीस सेवाओं को इस कानून के दायरे में लाया गया है। हर काम के लिए समय सीमा निर्धारित कर दी गई है। संबंधित विभागों की इसकी पुस्तक छपवाकर बंटवा दी गई है।

पिछले विधानसभा सत्र में पारित लोक सेवाओं के प्रदान की गारन्टी अधिनियम 2010 का शुभारम्भ 9 अक्टूबर को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान एक समारोह में करेंगे। सरकार का दावा है कि समय सीमा में आम जनता को लोक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से यह अधिनियम लागू किया जा रहा है। यह कानून लागू करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। इस कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए एक पृथक लोक सेवा प्रबंधन विभाग का गठन भी किया गया है। कानून के तहत, अधिसूचित सेवाएं समय-सीमा में प्रदान न करने पर दोषी कर्मचारी से वसूली गई जुर्माने की राशि पीड़ित व्यक्ति को दी जाएगी। इसके तहत प्रथम एवं द्वितीय अपील का प्रावधान भी किया गया है।

शुरूआत में जिन नौ विभागों की सेवाओं को इस कानून के दायरे में रखा गया है, उनमें ऊर्जा, श्रम, लोक स्वास्थ्य यात्रिकी, राजस्व, नगरीय प्रशासन एवं विकास, सामान्य प्रशासन, सामाजिक न्याय, आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण और खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग शामिल हैं।
ये सेवाएं इसके दायरे में रहेंगी- निम्नदाब के व्यक्तिगत नवीन बिजली कनेक्शन, 10 किलोवाट तक अस्थाई कनेक्शन प्रदान करना, निम्नदाब उपभोक्ताओं के मीटर बंद होने या तेज चलने की शिकायत पर जांच कराना एवं मीटर खराब पाए जाने पर सुधारना या बदलना। श्रम विभाग के तहत प्रसूति सहायता योजना, विवाह सहायता योजना एवं मृत्यु की दशा में अन्त्येष्टि एवं अनुग्रह सहायता योजना का लाभ प्रदान करना।

लोक स्वास्थ्य यात्रिकी विभाग में विभागीय हैण्डपंप की खराबी का सुधार, राजस्व विभाग में प्राकृतिक प्रकोप से शारीरिक अंगहानि अथवा मृत्यु होने पर आर्थिक सहायता, चालू खसरा-खतौनी एवं नक्शे की प्रतिलिपियों का प्रदाय, भू-अधिकार एवं ऋण पुस्तिका की नकल, नगरीय प्रशासन विभाग के तहत नवीन नल कनेक्शन देना, सामान्य प्रशासन विभाग के तहत स्थानीय निवासी प्रमाण पत्र जारी करना, सामाजिक न्याय विभाग के तहत सामाजिक सुरक्षा पेंशन, इंदिरा गाधी राष्ट्रीय वृद्वावस्था पेंशन, इंदिरा गाधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन तथा इंदिरा गाधी राष्ट्रीय नि:शक्त पेंशन प्रथम बार स्वीकृत एवं प्रदाय करना और राष्ट्रीय परिवार सहायता प्रदान करना, आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति कल्याण विभाग के अंतर्गत मध्यप्रदेश अनुसूचित जाति-जनजाति आकस्मिकता योजना नियम 1995 के अंतर्गत राहत प्राप्त न होने संबंधी आवेदन का समाधान करना और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में नवीन बीपीएल और एपीएल राशनकार्ड जारी करना।

सरकारी प्रवक्ता का कहना है कि कल शनिवार को अपरान्ह साढ़े तीन बजे स्थानीय रवीन्द्र भवन में इसका शुभारंभ होते ही यह कानून लागू हो जाएगा। प्रवक्ता ने कहा कि इस कानून के दायरे में धीरे-धीरे और विभाग लाए जाएंगे(दैनिक जागरण,भोपाल,8.10.2010)।

दैनिक भास्कर में सतीश आलिया की रिपोर्टः
भविष्य में मुख्यमंत्री भी लोक सेवा प्रदान गारंटी कानून के दायरे में आएंगे। यह एलान मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने आज शाम रवींद्र भवन में इस कानून को समारोहपूर्वक लागू करते हुए किया।

9 विभागों की सेवाएं शामिल: श्री चौहान ने कहा कि अभी नौ विभागों की 26 सेवाएं इसमें शामिल की गई हैं। बाद में अन्य विभागों की सभी योजनाओं को भी इसमें शामिल किया जाएगा। तय समय सीमा में काम नहीं करने वाले अफसरों, कर्मचारियों को ढाई सौ रुपए प्रति दिन और अधिकतम पांच हजार रुपए जुर्माना देना होगा। उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी। इस मौके पर नगरीय प्रशासन मंत्री बाबूलाल गौर ने कहा कि जुर्माने के अलावा अधिकारी कर्मचारियों की सीआर में भी यह दर्ज किया जाना चाहिए कि इन्होंने ठीक से काम नहीं किया।

लोगों को हो जानकारी: मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून समारोहपूर्वक इसलिए लागू किया जा रहा है, ताकि लोगों को पता चले कि उनके लिए यह सुविधा दी जा रही है। उन्होंने कहा कि इसकी दो करोड़ प्रतियां पूरे प्रदेश में बांटी जाएं, ताकि लोगों के पास लिखित में पहले से ही रहे कि कौन सा काम कितने दिन में होना चाहिए। न होने पर वे इस नए कानून के तहत अपील कर सकें। मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा कार्यकर्ता इस कानून की पुस्तिका को जेब में रखें और लोगों को समय पर सेवाएं दिलाएं। मुख्यमंत्री ने कहा कि वे भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने के हिमायती हैं, इसके लिए पाठ्यक्रमों में गीता और अन्य धार्मिक ग्रंथों के पाठ शामिल किए जाएंगे। ताकि बच्चों में आरंभ से नैतिक बल पैदा हो सके।

2 टिप्‍पणियां:

  1. यह तो सूचना के अधिकारा से भी आगे है। अर्थात सरकारी कर्मचारियों से समय पर सेवा लेने का अधिकार। जय हो।

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  2. बढ़िया पोस्ट , आभार .

    कृपया सुझाव दें - -
    " किताबों का डिजिटलाइजेशन "

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