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02 अक्टूबर 2010

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्तियों पर उठे सवाल

इलाहाबाद विश्वविद्यालय में पिछले दिनों की गई नए शिक्षकों की नियुक्तियां अवैध हैं। कम से कम विश्वविद्यालय के विधि सलाहकार पीएस बघेल द्वारा दी गई रिपोर्ट तो यही कहती है। इसके अनुसार बिना न्यायालय की अनुमति के विश्वविद्यालय नई नियुक्तियां नहीं कर सकता। वैसे विश्वविद्यालय के कार्यवाहक कुलपति प्रो. केजी श्रीवास्तव का कहना है कि यह सलाह सिर्फ दर्शनशास्त्र विभाग में हुई नियुक्तियों तक सीमित है। अन्य विभागों में हुई नियुक्ति पर इसका कोई असर नहीं है। इलाहाबाद विवि के दर्शनशास्त्र विभाग में पूर्व में तैनात रहे अतिथि प्रवक्ताओं को हटाने का मामला अभी तक हल नहीं हो सका है। दर्शनशास्त्र विभाग में शिक्षकों के आठ पद रिक्त थे। विश्वविद्यालय ने 31 जुलाई को इसमें से पांच शिक्षकों का चयन किया था। इन सभी ने कार्यभार संभाल लिया। 17 अगस्त को बचे हुए तीन पदों व प्रो. एचएस उपाध्याय के परीक्षा नियंत्रक बनने के बाद खाली हुए पद को मिला कर कुल चार अतिथि प्रवक्ताओं का चयन कर लिया गया। इसमें पूर्व में तैनात रहे दो अतिथि प्रवक्ता डा. राजेश कुमार तिवारी व डा. विवेक कुमार पाण्डेय भी शामिल रहे। पूर्व में तैनात तीन अतिथि प्रवक्ताओं ने साक्षात्कार में भाग नहीं लिया। यह प्रवक्ता वर्ष 2008 में उच्च न्यायालय द्वारा जारी अंतरिम आदेश के क्रम में पुन: बहाली की मांग कर रहे थे(दैनिक जागरण,इलाहाबाद,2.10.2010)।

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