देश के लगभग 22 करोड़ छात्र-छात्राएं हर साल इंटर उत्तीर्ण करके डिग्री के नाम पर केवल एक कागज का टुकड़ा सहेजते हैं। इनको डिग्री शिक्षा देने के लिए न तो पर्याप्त कालेज हैं और न ही विश्वविद्यालय। ऐसी स्थिति में डिग्री के साथ बच्चों की क्षमता, मेधा व रुचि के अनुसार रोजगारपरक पाठ्यक्रम पढ़ाने की जरूरत है। इसके लिए देश में अमेरिका के तर्ज पर कम्युनिटी कालेज खोले जाने की तैयारी है। यह संकेत बीते माह मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल के साथ अमेरिका के विश्वविद्यालयों का दौरा करके लौटे शिक्षाविदों से मिले हैं। समिति के सदस्य और आईआईटी निदेशक प्रो. संजय गोविंद धांडे के मुताबिक टीम का प्रमुख उद्देश्य उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विदेशी विवि से मिलने वाली संभावित मदद, लाभकारी मॉडल, वहां के विश्वविद्यालयों की अवस्थापना सुविधाओं व शिक्षकों की क्षमता का उपयोग आदि का आकलन करना था। टीम ने कैलीफोर्निया विश्वविद्यालय, वर्जीनिया टेक विश्वविद्यालय, येई यूनिवर्सिटी न्यूयार्क तथा बर्कले आदि विश्वविद्यालयों के साथ फूट हिल कम्युनिटी कालेज तथा डियांगा कम्युनिटी कालेज के प्रतिनिधियों से बैठकें कीं तथा आईआईटी के पूर्व छात्रों के संगठन यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल सहित पांच दिनों में 30 बैठकें कीं। इनसे जो निष्कर्ष निकले हैं, उसके अनुसार इंटर उत्तीर्ण करने वाले सभी छात्रों को उच्च शिक्षा देने के लिए परंपरागत डिग्री कालेज खोलने के बजाय कम्युनिटी कालेज खोले जाने चाहिए ताकि उनसे निकले छात्रों के हाथ में रोजगार हो। इसके लिए आईटीआई व पॉलीटेक्निक संस्थानों का स्वरूप भी बदलना होगा। चूंकि सरकारी स्तर पर इतने धन की व्यवस्था संभव नहीं है इसलिए निजी संस्थानों को मौका देना होगा। खास बात वर्तमान में 12 वीं के बाद डिग्री में जाने वाले छात्रों का प्रतिशत चीन में 23.5 है जबकि भारत में 12.4 है। 2020 तक इस प्रतिशत को बढ़ाकर 25 करने का लक्ष्य है। शिक्षा अधिकार अधिनियम लागू होने से बच्चों की संख्या बढ़नी तय है। इसके चलते भी गुणवत्ता के आधार पर निजी सेक्टर को शामिल करना होगा। विदेशी शैक्षिक संस्थाओं को भी मौका देना होगा। वर्जीनिया टेक कालेज जल्दी ही मद्रास में अपनी शाखा खोल रहा है।
क्या है कम्युनिटी कालेज
कम्युनिटी कालेज में छात्रों में निहित विशिष्ट गुणों (कला, संगीत, तकनीकी, लेखन तथा भाषा से जुड़े) की पहचान कर उसी से जुड़ा व्यवसायिक पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है। उसके साथ सामान्य विषय (भौतिकी, रसायन व गणित तथा कला संकाय) भी पढ़ाये जाते हैं। कालेज से निकले छात्र यदि डिग्री में जाना चाहते हैं तो सामान्य विषयों के अंकों के आधार पर वहां प्रवेश मिलता है और यदि रोजगार में जाना चाहते हैं तो वहां चले जाते हैं। शिक्षा की स्थिति (लगभग में) देश में कालेज 24,000 देश में विश्वविद्यालय 450 चाहिए होंगे कालेज 40 हजार चाहिए होंगे विश्वविद्यालय 800 कालेज शिक्षा के बच्चे 22 करोड़ इनमें डिग्री में जाते (प्रतिशत) 12.4 2020 का लक्ष्य (प्रतिशत) 25 छात्रों को रोजगार न मिलने की स्थिति में अपराध, अराजकता व समाज विरोधी दूसरी गतिविधियों को बढ़ावा मिल सकता है। इसलिए उच्च शिक्षा में रोजगारपरक व्यवहारिक पाठ्यक्रम बढ़ाने होंगे। -प्रो. संजय गोविंद धांडे, निदेशक आईआईटी(दैनिक जागरण,कानपुर,2.10.2010)।
वल एक कागज का टुकड़ा सहेजते हैं..
जवाब देंहटाएंकाम कि चीज है जरुर पढ़े .... और हाँ एक टिपण्णी अवश्य कर दे ...
http://chorikablog.blogspot.com/2010/10/blog-post_9864.html