संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले भारतीयों के लिए तनाव अत्यंत खतरनाक साबित हो रहा है और इसके चलते वे मौत के शिकार हो रहे हैं। अबू धाबी में भारतीय दूतावास के जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, संयुक्त अरब अमीरात में भारतीयों की प्राकृतिक मौत के मामलों में ज्यादातर लोगों की जान तनाव संबंधी बीमारियों के चलते जाती है। दूतावास के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2009 में 403 लोगों की मौत दर्ज की गई जिनमें से लगभग 71 फीसदी प्राकृतिक कारणों से हुईं और इनमें से अधिकतर की वजह तनाव संबंधी बीमारियां रहीं। रिकॉर्ड के अनुसार, भारतीयों में तनाव के लगभग 90 प्रतिशत मामले रोजगार से संबंधित होते हैं। सेमिनार प्रमोशन ऑफ वर्कप्लेस मेंटल हेल्थ-कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी परस्पेक्टिव में अधिकारियों ने कहा कि दूतावास की सामुदायिक कल्याण इकाई को मिलने वाली शिकायतों में से केवल 10 फीसदी ही व्यक्तिगत समस्याएं वाली होती हैं। यूएई में लगभग 17 लाख भारतीय हैं और इस देश में यह संख्या अन्य देशों के लोगों के मुकाबले सर्वाधिक हैं। भारतीय राजदूत एमके लोकेश ने कहा, अपने कर्मियों का बेहतर मानसिक स्वास्थ्य सुनिश्चित करने में उद्यमियों की बड़ी भूमिका होती है। मधुमेह और हृदय संबंधी बीमारियों को तनाव संबंधी रोग माना जाता है और यही बीमारियां इन मौतों का कारण हैं। दूतावास की सामुदायिक कल्याण इकाई के प्रमुख और काउंसलर डॉ. के. एलनगोवन ने बताया कि अधिकतर प्राकृतिक मौतें औसतन 41 साल की उम्र में तनाव संबंधी बीमारियों के चलते होती हैं। उन्होंने कहा कि कुछ अध्ययनों के अनुसार ऐसे ही मामलों में भारत में औसत आयु 56 साल है। एलनगोवन के अनुसार, दुबई स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में दर्ज मौतों के मामलों में भी यही रुझान है। अधिकारी ने कहा कि सात प्रतिशत मौतें आत्महत्या थीं जो तनाव के चलते हुईं। लगभग 15 प्रतिशत मौतें दुर्घटनाओं में हुईं और सात प्रतिशत अन्य कारणों से हुईं। उन्होंने कहा कि भर्ती संबंधी घोटालों और अन्य संबंधित समस्याओं को रोकने के लिए नवम्बर में एक वेब आधारित समाधान शुरू किया जाएगा। दूतावास भारतीय श्रमिक संसाधन केंद्र स्थापित कर रहा है जिस पर एक टोल फ्री नंबर के जरिए 24 घंटे भारतीयों की शिकायतें सुनाई जाएंगी। दूतावास संयुक्त अरब अमीरात के बड़े हवाई अड्डों पर कांउटर खोलने पर विचार कर रहा है(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,5.10.2010)।
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