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23 नवंबर 2010

बाजार में कॉर्पोरेट बचत के उत्पाद

सीआरएम अब छोटे और मध्यम वर्ग उद्यमों के लिए भी
प्रौद्योगिकी की ओर लोगों के बढ़ते आकर्षण ने उत्तम गैजेट्स,सॉफ्टवेयर,गेम्स,मोबाइल फोन की दुनिया को नई राह दिखाई है। आज यह प्रगति लोगों के बढ़ते विवेक पर काबू पाने में सक्षम है लेकिन आज भी जब हम सीआरएमकी बात करते हैं तो ऐसा बहुत कुछ है जो पूरी तरह जांचा और परखा तो गया है पर जब उद्यमों द्वारा लागू किया जाता है तो उसके परिणाम विश्वसनीय नहीं होते। आमतौर पर सीआरएम किसी कंपनी में व्यापक रूप से लागू की जाती है ताकि कंपनी अपने ग्राहकों और बिक्री प्रक्रिया से नियमित रूप से फॉलोअप कर सके। साथ ही कंपनियां रोजाना इसकी देख-रेख नहीं कर पातीं। इससे कंपनियों को यह नहीं पता चल पाता। सेल्सबाबू बिजनेस सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड ने सेल्सबाबू सीआरएम सॉफ्टवेयर बनाया है जो कि न सिर्फ ऊपर लिखित विशेषताएं प्रदान करेगा बल्कि उसको इस तरह डिजाइन किया गया है कि उद्यमों के परिचालन लागत कम करने के साथ-साथ उद्यमों के ग्राहकों को संतुष्ट कर मुनाफा दर में भी वृद्धि लाएगा। इस सॉफ्टवेयर के इंस्टॉलेशन का कोई चार्ज नहीं है, इसके अलावा इसकी देख-रेख (मेंटीनेंस) की सुविधा भी निःशुल्क है। इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल ऑनलाइन किया जाएगा। इसके अंतर्गत उपयोगकर्ता ऐसे विकल्प का चयन कर सकेंगे जो उनकी पहुंच के अंदर तो हो ही, साथ ही इन्फ्रास्ट्रक्चर और सेटअप लागत को भी कवर कर सके। इसके अलावा इस सॉफ्टवेयर को कंप्यूटर में डालने के बाद सभी प्रबंधन अधिकारियों को प्रत्येक डाटा की जानकारी मिलती रहेगी कि कर्मचारी ने कब और क्या डाटा डाला है।

पानी और पैसे-दोनों की बचत
"जल ही जीवन" बच्चों को स्कूल में ही पढ़ाया जाता है लेकिन बड़े होते-होते लोग यह बात व्यावहारिक रूप से नहीं अपनाते। साथ ही अब लोगों को यह भी समझना चाहिए कि पानी बर्बादी पैसे की बर्बादी भी है। नहाने से लेकर साफ-सफाई तक पानी की बर्बादी जम कर होती है और जहां एक लीटर पानी का इस्तेमाल होना चाहिए वहीं कई लीटर पानी की बर्बादी होती है। साथ ही आपका घरेलू बजट भी डावांडोल हो जाता है। पानी और पैसा बचने के इस प्रयास में ऐजी एक्वा सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड लेकर आए हैं पानी रहित उत्पाद जिसमें पानी की बर्बादी बिलकुल भी नहीं होती। इन उत्पादनों की खासियत यह है की इसमें किसी भी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं होता जिससे वातावरण को तो साफ रखा ही जा सकता है साथ ही रोजमर्रा के उपयोग के लिए यह उत्पाद पूरी तरह से सुरक्षित भी है। पहली बार भारत में ऐसी तकनीक का प्रयोग हुआ है(नई दुनिया,दिल्ली,23.11.2010)।

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