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10 नवंबर 2010

बरकतउल्ला विविःरजिस्ट्रार तक बढ़ा बीपीएड का शिकंजा

शारीरिक शिक्षा की दो साल पुरानी परीक्षा एक बार फिर बरकतउल्ला विश्वविद्यालय को पटकनी देने जा रही है। कुलपति की रवानगी और चार अफसरों के निलंबन की वजह बन चुकी इस परीक्षा में हुई गड़बड़ी की आंच अब रजिस्ट्रार तक पहुंच गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर राज्य शासन रजिस्ट्रार सहित चारों अधिकारियों के खिलाफ सजा तय करने में जुट गया है। सजा का स्तर तय होते ही इस संबंध में आदेश जारी किए जा सकते हैं। सत्र 2007-08 की बीपीएड-एमपीएड परीक्षा में भारी गड़बड़ी सामने आते ही राज्यपाल ने परीक्षा स्थगित कर दी थी। साथ ही धारा 10(1) के तहत आयुक्त की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने चारों निलंबित अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी थी। विभाग ने जांच पूर्ण कर ली है। सूत्रों के मुताबिक जांच रिपोर्ट में सीधे तौर पर कुलपति और कुलसचिव की जिम्मेदारी बताई गई है। राज्य शासन ने परीक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं की असफलता के लिए विवि प्रशासन को दोषी माना है। तत्कालीन कुलपति भूपाल सिंह को तो छह माह के भीतर ही पद से हटा दिया गया था। मगर प्रदेश में यह पहला मौका था, जब धारा 52 लगाने के बाद भी कुलसचिव को क्लीनचिट दी गई हो। अब करीब एक साल बाद रजिस्ट्रार के खिलाफ भी कार्यवाही की तैयारी शुरू कर दी गई है। बताया जाता है कि इस मामले में दो अलग-अलग फाइल मंत्री के पास भेजी गई हैं। इनमें से निलंबित हुए चारों अधिकारियों के खिलाफ तो मंत्री ने सजा तय कर फाइल लौटा दी है, लेकिन रजिस्ट्रार के लिए अलग से भेजी गई फाइल अभी भी विभाग में नहीं लौटी है। मंत्री को भेजी सजा की सूची : अधिकारियों के मुताबिक इस मामले में केवल डॉ.आनंद कामले डिप्टी रजिस्ट्रार ही कोरे बच सकते हैं। इसकी वजह वे परीक्षा से संबंधित शाखा में ही नहीं थे। वे बेवजह घेरे में आ गए। इनके अलावा डिप्टी रजिस्ट्रार डॉ. एचएस त्रिपाठी व सहायक कुलसचिव सुनील खरे व यशवंत पटेल को निलंबित किया गया था। इन चारों के खिलाफ लघ़ु शास्ति की अनुशंसा की गई है। विभाग ने दीर्घ और लघु शास्ति के तहत दी जाने वाली सजा की सूची भी मंत्री को भेजी है। यदि सबसे छोटी भी सजा तय की गई तो रजिस्ट्रार को इस पूरे मामले में परिनिंदा झेलना पड़ेगी। इसका उल्लेख उनकी सेवा पुस्तिका व गोपनीय चरित्रावली भी किया जाएगा। जबकि बड़ी सजा के रूप में कुछ क्रमोन्नति रोकने का दंड मिल सकता है।

पूर्व मंत्री ने भी दिया था नोटिस :
मामला सामने आते ही तत्कालीन उच्च शिक्षा मंत्री अनूप मिश्रा ने भी कुलसचिव डॉ. संजय तिवारी को नोटिस जारी किया था। चारों अधिकारियों को निलंबित करने के साथ ही श्री तिवारी से जवाब तलब किया गया था, लेकिन जवाब मिलने से पहले ही श्री मिश्रा से विभाग छिन गया। इसके चलते मामला दब गया था। वीसी ने भी माना था दोषी : हंगामे के तत्काल बाद कुलपति भूपाल सिंह ने इस मामले में नोटशीट जारी कर उप और सहायक कुलसचिव के अलावा कुलसचिव पर भी उंगली उठाई है। सूत्रों के मुताबिक कुलपति ने इस नोटशीट में लिखा है कि मैं बार-बार परीक्षा के संबंध में चर्चा कर जानकारी लेता था। हर बार छोटी-मोटी समस्या बताकर खुद हल करने का दावा किया जाता था। मुझे मामला बिगड़ने पर परीक्षा के एक दिन पहले आठ अप्रैल को ही जानकारी क्यों दी गई। साथ ही उन्होंने बीएड के मामले में विशेष ध्यान देने की हिदायत दी है(दैनिक जागरण,भोपाल,10.11.2010)।

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