विभिन्न विश्व विद्यालयों के सेवानिवृत्त शिक्षक और कर्मचारियों के बकाये का भुगतान नहीं होने को मानव संसाधन विभाग ने गंभीरता से लिया है। विभाग ने बकाया भुगतान के लिए तीन माह का डेडलाइन तय कर लापरवाह अधिकारियों को एक बार फिर चेतावनी दी है।
विश्वविद्यालयों में तैनात अंकेक्षकों, वित्त अधिकारियों और कुलसचिवों की राज्यस्तरीय बैठक में मानव संसाधन विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बकाए के सुस्त वितरण पर नाराजगी जताई है। उन्होंने अधिकारियों को हिदायत देते हुए कहा कि टालमटोल की नीतियों से काम नहीं चलने वाला है। उन्होंने क़ड़े लहजे में कहा कि सेवानिवृत्त कर्मियों के बकाए का भुगतान नहीं होना किसी क्रिमिनल एटीट्यूड से कम नहीं है।
उन्होंने अभियान चलाकर तीन माह में सेवानिवृत्त कर्मचारियों के बकाए का भुगतान का आदेश दिया है। उधर, बकाया भुगतान न होने से अदालती मामलों में ब़ढ़ोत्तरी से विभाग सकते में है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में तैनात अंकेक्षकों को भी चेताया और कहा कि उनकी छुट्टी की गणना विश्वविद्यालय अधिनियम के तहत न होकर सरकारी कैलेंडर के तहत होगी। सरकारी कैलेंडर के अनुसार ही विश्वविद्यालयों में उन्हें ड्यूटी बजानी होगी।
छुट्टी के दौरान अंकेक्षकों के बैठने और फाइलवर्क के लिए कार्यालय की व्यवस्था का जिम्मा रजिस्ट्रारों पर डाला गया। अंकेक्षकों प्रति सप्ताह बकाए से संबंधित १० संचिकाओं के निष्पादन विहित फार्म के आधार पर करने का निर्देश दिया गया है। वहीं रजिस्ट्रारों से सेवानिवृत्त कर्मियों के सभी तरह के बकाए एकमुश्त अंकेक्षकों को देने का निर्देश दिया गया है। सूत्रों के अनुसार भागलपुर विवि को छो़ड़कर किसी विवि ने बकाये के लिए दी गई राशि का सदुपयोग नहीं किया है। गौरतलब है कि वर्ष २००९ में बकाए के भुगतान के लिए विवि को कुल २०० करो़ड़ ヒपये भेजे गए थे। सूत्रों के मुताबिक ७५ फीसदी राशि ही अबतक बंट सकी है। वहीं चालू वित्तीय वर्ष के लिए दिए गए ३०० करो़ड़ रूपये में भी फूटी कौ़ड़ी का वितरण नहीं किया जा सका(नई दुनिया,दिल्ली,23.11.2010)।
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