बिहार में व्यापक पैमाने पर प्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों के नियोजन के लिए स्वपोषित बीएड कोर्स चलाने के प्रस्ताव को स्वीकार करने के प्रति अंगीभूत कालेज के ढुलमुल रवैये को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है तथा कुलसचिवों को इस दिशा में अपने स्तर पर कदम उठाने को कहा है। विभाग ने विगत सितंबर माह में ही विभिन्न विश्वविद्यालयों के अधीन 250 अंगीभूत कालेजों के प्रधानाचार्यो की बैठक आहूत कर उन्हें प्रस्ताव से अवगत कराया था। जब अनेक कालेजों ने कोर्स चालू करने में दिलचस्पी दिखायी तब विभाग ने कुलसचिवों को पत्र भी लिखा था। उन्हें कहा गया था कि वे कोर्स चलाने को इच्छुक कालेजों में इसकी पढ़ाई शुरू कराने के लिए उन संस्थानों को एनसीटीई से मान्यता दिलाने की कार्रवाई करें। जो प्रावधान हैं उनके मुताबिक कोर्स चलाने के इच्छुक कालेजों को पांच लाख रुपये अपने पास इन्डावमेंट फंड में तथा तीन लाख रुपये रिजर्व फंड खाते में रख कर एनसीटीई को इसकी सूचना देनी होगी। एनसीटीई कालेज का निरीक्षण करेगा। इसके लिए कालेजों को आवेदन शुल्क के तौर पर एक हजार रुपये तथा निरीक्षण शुल्क के तौर पर 40 हजार रुपये देने होंगे। विभागीय फैसले के तहत निर्धारित राशि जुटाने में विश्वविद्यालय महाविद्यालयों की सहायता करेंगे। वे इस कार्य के लिए अपने आंतरिक स्त्रोतों का भी इस्तेमाल कर सकते हैं। मान्यता प्राप्त होने के बाद कालेज बीएड कोर्स चला कर अलग आमदनी कर सकेंगे। कालेजों में बीएड कोर्स चालू करने के संदर्भ में विभाग की सोच यह है कि प्रदेश में पर्याप्त संख्या में शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान नहीं हैं। मात्र 67 मान्यता प्राप्त संस्थानों के माध्यम से बड़े पैमाने पर शिक्षक अभ्यर्थियों को प्रशिक्षण दे पाना नामुमकिन है। अभी अधिकांश शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान निजी क्षेत्र में हैं(दैनिक जागरण,पटना,22.11.2010)।
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