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24 नवंबर 2010

छत्तीसगढ़ःहैंडराइटिंग एक्पर्ट ने किया छात्रों की बेईमानी का पर्दाफाश

पुनर्मूल्यांकन में छात्रों के अंक कम आए तो उन्होंने कहा कि हमारी जगह किसी और ने पुनर्मूल्यांकन फॉर्म भरा होगा। लेकिन राइटिंग एक्पर्ट ने छात्रों की बेइमानी का पर्दाफाश कर दिया।

विवि के ऐसे तीन छात्रों का फर्जीवाड़ा उजागर किया है। अब छात्रों पर कार्रवाई करने के बारे में विवि विचार कर रहा है। एलएलएम के छात्र हरप्रीत सिंह चावला के प्रकरण ने विवि को काफी परेशान किया।

पुनमरूल्यांकन में छात्र के अंक परीक्षा में पाए गए अंकों से कम आए थे। छात्र ने कहा कि उसने पुनमरूल्यांकन का फार्म ही नहीं भरा। उसके नाम से किसी ने आवेदन कर दिया। विवि ने मामले की जांच का जिम्मा हैंड राइटिंग एक्सपर्ट को सौंपा।

उनकी रिपोर्ट में कहा गया कि आवेदन हरप्रीत ने ही किया था। इसी तरह का मामला एमजेएमसी पूर्व के छात्र सौरभ मिश्रा का भी था। वह भी फर्जीवाड़े का दोषी पाया गया।

उत्तरपुस्तिका की लिपि में मिली भिन्नता :
बीएएलएलबी प्रथम सेमेस्टर के छात्र अभिषेक गुप्ता ने आरोप लगाया कि इतिहास और दर्शनशास्त्र की उत्तरपुस्तिका में यूनिट चार और पांच की जांच नहीं हो पाई। इस वजह से वह अनुत्तीर्ण रहा। पुनमरूल्यांकन में भी यही स्थिति रही।

जांच में पाया गया कि मुख्य उत्तरपुस्तिका में संलग्न 4 पृष्ठों की लिपि अन्य पृष्ठों की लिपि से बिल्कुल भिन्न है। चार पृष्ठों लंबाई, लकीरें और स्याही भी मुख्य उत्तरपुस्तिका से अलग है।

"इन छात्रों ने विवि की छवि धूमिल करने की कोशिश की। राइटिंग एक्सपर्ट के माध्यम यह भेद खुला। इन छात्रों पर क्या कार्रवाई होगी वह आगे तय किया जाएगा-"के.के चंद्राकर, कुलसचिव(दैनिक भास्कर,रायपुर,24.11.2010)

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