उत्तर प्रदेश में शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े विकासखंडों में असेवित योजना के तहत कॉलेजों के निर्माण के लिए अनुदान देने में अब शासन में बैठे हाकिमों की मनमर्जी नहीं चलेगी। कॉलेजों के निर्माण के लिए अनुदान देने की खातिर नियमावली बनायी जाएगी। वित्त विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग को साफ कह दिया है कि जब तक नियमावली न बन जाए, तब तक किसी को कॉलेज निर्माण के लिए अनुदान न दिया जाये। असेवित योजना के तहत उच्च शिक्षा विभाग पिछड़े विकासखंडों में स्नातक स्तरीय कॉलेज के भवन (एक ब्लॉक में अधिकतम चार कॉलेजों के लिए) निर्माण के लिए अनुदान दे सकता है। इनमें से तीन सहशिक्षा के हो सकते हैं और एक महिलाओं के लिए। कला व वाणिच्य संकाय के लिए 30 लाख तथा विज्ञान वर्ग के लिए 40 लाख अनुदान दिया जाता है। योजना के लिए जारी शासनादेश में कहा गया है कि अनुदान की धनराशि का दुरुपयोग करने पर यह पैसा 16.5 प्रतिशत की ब्याज दर सहित वसूला जाएगा। आजमगढ़ के अतरौलिया ब्लॉक में एक कॉलेज के निर्माण के लिए 2006 में 10 लाख की पहली किस्त जारी की गई थी। कॉलेज की जमीन विवादित होने के कारण उस पर भवन निर्माण नहीं हो पाया। तीन साल बाद भी अनुदान की धनराशि का उपयोग प्रमाणपत्र न देने पर कॉलेज के प्रबंधतंत्र को नोटिस दी गई। इस पर कॉलेज के प्रबंधतंत्र ने शासन को ब्याज माफ करने के लिए आवेदन किया और यह भी कहा, उसे अनुदान के रूप में दिया गया मूलधन वापस ले लिया जाए। यह पत्रावली वित्त विभाग को भेज दी गई। इस बीच यह और ऐसे ही कुछ अन्य मामले लोक लेखा समिति को संदर्भित हुए। समिति ने शासन से पूछा इन मामलों में अब तक रिकवरी क्यों नहीं हुई। इस पर शासन ने आजमगढ़ में प्रस्तावित कॉलेज के प्रबंधतंत्र को ब्याज सहित मूलधन की वसूली के लिए लगभग 20 लाख की नोटिस जारी कर दी। वित्त विभाग ने पत्रावलियों का परीक्षण के बाद निर्णय दिया कि अनुदान राशि पर ब्याज तब तक नहीं वसूला जा सकता जब तक कि नियमावली न बन जाए। वित्त विभाग ने इस बारे में उच्च शिक्षा विभाग को फिलहाल मूलधन जमा कराने के लिए कहा है। नियमावली बनाने के लिए वित्त विभाग ने सुझाव भी दिये हैं। उसने कहा है कि कॉलेज निर्माण के लिए अनुदान प्रथम आवत, प्रथम पावत के सिद्धांत पर दिया जाए। अनुदान की राशि में से प्राथमिकता के आधार पर सर्वप्रथम तीसरी किस्त, फिर दूसरी और इसके बाद ही पहली किस्त के हकदार कॉलेजों को धन आवंटित किया जाए(राजीव दीक्षित,दैनिक जागरण,लखनऊ,3.11.2010)।
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