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03 नवंबर 2010

शहरी सहकारी बैंकों को मिली आजादी

रिजर्व बैंक ने मंगलवार को शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए कई सुधारवादी कदमों की घोषणा की है। इसके बाद यूसीबी को अपने कारोबार बढ़ाने की आजादी मिल गई है। यूसीबी को दूसरे राज्यों में कमजोर बैंकों को खरीदकर अपनी शाखा का विस्तार करने की अनुमति दे दी गई है। यूसीबी के लिए शाखा खोलने और होमलोन बांटने संबंधी नियमों को भी काफी उदार बना दिया गया है। आरबीआइ ने यह भी संकेत दिए हैं कि अब वह यूसीबी के लिए नए लाइसेंस देने को भी तैयार है। रिजर्व बैंक ने वार्षिक मौद्रिक नीति 2010-11 की दूसरी तिमाही समीक्षा करते हुए यूसीबी को मजबूत बनाने के लिए जो घोषणाएं की हैं वे उन्हें बैंकिंग प्रतिस्पद्र्धा में बेहतर तरीके से टिके रहने में मदद करेंगी। यूसीबी के साथ ही रिजर्व बैंक ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) पर भी नई शाखा खोलने संबंधी मौजूदा पाबंदियों में काफी नरमी बरतने की बात कही है। आरआरबी के बारे में कहा गया है कि वे 50 हजार तक की आबादी वाले शहरों में भी केंद्रीय बैंक की पूर्व मंजूरी के बगैर शाखा खोल सकेंगे। अभी तक आरआरबी सिर्फ ग्रामीण इलाकों में ही कार्यरत रहे हैं। यूसीबी को कहा गया है कि वे अपनी कुल परिसंपत्ति के 10 फीसदी हिस्से के बराबर होमलोन का वितरण कर सकेंगे। इसका आधा 10 लाख रुपये के मूल्य वाली आवासीय इकाइयों के खरीद के लिए बतौर लोन दिया जाना चाहिए। अभी तक यूसीबी कुल जमा राशि का 15 फीसदी तक ही होमलोन दे सकते थे। यूसीबी के लिए व्यक्तिगत कर्ज की सीमा भी बढ़ा दी गई है। आरबीआइ के ताजा कदमों से लगता है कि अब यूसीबी को बैंकिंग क्षेत्र में ज्यादा बड़ी भूमिका निभाने के अनुकूल माना जा रहा है। 50 करोड़ रुपये से ज्यादा नेट वर्थ वाले यूसीबी को एक राज्य में पंजीयन होने के बावजूद दूसरे राज्यों में कारोबार करने की अनुमति दे दी गई है। आरबीआइ ने उन्हें दूसरे राज्यों में अन्य कमजोर बैंकों को खरीदने की भी सशर्त छूट दे दी है। नए यूसीबी का लाइसेंस देने के लिए एक समिति गठित की गई है, जो छह महीने में रिपोर्ट देगी। उम्मीद की जानी चाहिए कि अगले वर्ष के अंत तक नए यूसीबी को लाइसेंस देने का काम शुरू हो जाएगा(दैनिक जागरण,दिल्ली,3.11.2010)।

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