मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार, यानी छुट्टी के दिन आला पुलिस अफसरों के साथ विधि-व्यवस्था और पुलिस में उपलब्ध रिक्तियों को तीव्र गति से भरने के मुद्दे पर ढाई घंटे की मैराथन बैठक की। मुख्यमंत्री ने गृह विभाग व पुलिस महकमे को निर्देश दिया कि पुलिस- पब्लिक के राष्ट्रीय औसत तक पहुंचने के लिहाज से हर साल नौ हजार सिपाही व एक-एक हजार दरोगा की नियुक्ति की जाये। इस हिसाब से अगले पांच वर्ष में 45 हजार सिपाही और पांच हजार दरोगा की नियुक्ति संभव हो सकेगी। मुख्यमंत्री ने पुलिस महकमे को नये वर्ष के लिए एक महत्वपूर्ण टास्क यह दिया है कि सभी जिलों में प्राथमिकता के आधार पर एक-एक महिला थाना तथा 30 जिलों में अनुसूचित जाति- जनजाति थाने खोले जायें। बैठक में मुख्य सचिव अनूप मुखर्जी, गृह सचिव अमीर सुबहानी, डीजीपी नीलमणि व एडीजी (पुलिस मुख्यालय) पीके ठाकुर भी उपस्थित थे। विधि-व्यवस्था नियंत्रण के मसले पर बैठक में विशेष चर्चा हुई। इस दौरान एडीजी विधि-व्यवस्था पीएन राय भी मौजूद थे। मुख्यमंत्री ने कम्युनिटी पुलिसिंग को अपनाये जाने पर अधिक जोर दिया। इसके तहत स्थानीय पुलिस स्थानीय स्तर पर समिति का गठन कर देती है और फिर समिति और पुलिस दोनों मिलकर अपराध नियंत्रण का काम करते हैं। कुछ स्थानों पर यह व्यवस्था कारगर तरीके से काम भी कर रही है। बैठक में स्थानीय समिति के गश्त के परामर्श पर भी लंबी चर्चा चली। ट्रैफिक के बढ़ते दबाव को ध्यान में रख यह तय हुआ कि ट्रैफिक पुलिस के जवानों को आधुनिक तरीके से प्रशिक्षण दिलाया जाये। मुख्यमंत्री ने पुलिस में रिक्त पदों को भरे जाने के मसले पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि हर हाल में हमें इस क्षेत्र में राष्ट्रीय औसत के करीब पहुंचना है। मुख्यमंत्री ने अफसरों से दरोगा व सिपाहियों की रिक्ति का जायजा लिया। उन्हें बताया गया कि दरोगा, साजर्ेंट मेजर और कंपनी कमांडर की अभी लगभग 600 रिक्तियां हैं। अकेले सीधी नियुक्ति के तहत 300 दरोगा की बहाली होनी है। इसी तरह सिपाही की अभी 5000 रिक्ति है। इन सब रिक्तियों के लिए जल्द ही अवर सेवा चयन पर्षद व संबंधित भर्ती बोर्ड को लिखा जायेगा। नियुक्ति प्रक्रिया को चरणबद्ध तरीके से अंजाम दिया जायेगा। हर वर्ष की रिक्ति के लिए उसी वर्ष भर्ती प्रक्रिया को अंजाम दिया जायेगा। नये थाने व पद सृजन के बाद रिक्तियों की संख्या और बढ़ेगी(दैनिक जागरण,पटना,13.12.2010)।
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