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13 दिसंबर 2010

दुर्लभ भारतीय भाषाओं का संरक्षण करेगी कैंब्रिज परियोजना

कैंब्रिज विश्वविद्यालय ने विलुप्ति के कगार पर खड़ी भारतीय भाषाओं को बचाए रखने का बीड़ा उठाया है। इनमें वे भाषाएं शामिल हैं जो बोलचाल में इस्तेमाल से दूर होती जा रहीं हैं। भारत समेत दुनिया की ऐसी तमाम भाषाओं की लोगों तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए विश्वविद्यालय ने एक विशेष परियोजना शुरू की है। इसके तहत विवि के शोधकर्ताओं ने एक डाटाबेस तैयार किया है। यह व‌र्ल्ड ओरल लिटरेचर प्रोजेक्ट की वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट ओरल लिटरेचर डॉट ओआरजी पर उपलब्ध है। विवि सूत्रों ने बताया कि इस परियोजना में विश्व की 3,524 भाषाओं के रिकार्ड शामिल किए गए हैं। केरल के पलक्कड़ जिले के मुदुगर और कुरुम्बर समुदायों के साहित्य और संस्कृति को संरक्षित किया गया है। इसके लिए डिजिटल वीडियो, ऑडियो और तस्वीरों का इस्तेमाल किया गया है। भारत पर आधारित अन्य परियोजना में राजस्थान के बूंदी जिले के थिकारदा गांव में नाग देवता तेजाजी के जीवन के बारे में 20 घंटों की गाथागीत की रिकार्डिंग भी शामिल है। इसमें राजस्थान के हाड़ोती क्षेत्र में तेजाजी के रीति-रिवाज व परंपरा पर दस्तावेज तैयार करना भी शामिल है। इस रिकार्डिंग को हाड़ोती से हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद किया जाएगा। बाद में इसे एक पुस्तक व डीवीडी के रूप में तैयार कर वितरित किया जाएगा। शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह डाटाबेस उन्हें दुनिया की भाषाओं व उनमें मौजूद कहानियों, गीतों, मिथकों, लोकगीतों और अन्य परंपराओं के लिए एक विशाल स्रोत तैयार करने में सक्षम बनाएगा(दैनिक जागरण,दिल्ली संस्करण,13.12.2010 में लंदन की रिपोर्ट)।

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