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13 दिसंबर 2010

बिहारःमेडिकल में पीजी कोर्स में दाखिले में दाखिले के लिए सिर्फ 8 दिन शेष,नियमों का अता-पता नहीं

यह कैसी विसंगति है कि डाक्टर अपने ही राज्य (बिहार) में एमडी या एमएस जैसी ऊंची डिग्रियां नहीं ले पायेंगे। ऐसे सवाल बड़ी संजीदगी से पूछे जा रहे हैं। दरअसल, पीजी कोर्स में दाखिले के लिए आवेदन जमा करने के लिए मात्र आठ दिन बचे हैं और अभी तक संबंधित नियम नहीं बदल सका है। डाक्टरों का कसूर केवल इतना है कि इन्होंने राज्य के बाहर एमबीबीएस की पढ़ाई की है। सरकार ने एक वर्ष पूर्व यह विसंगति दूर करने की घोषणा की थी, परन्तु अब तक ऐसा नहीं हो पाया है। सीबीएसई की प्रतियोगिता परीक्षा में पास करने के पश्चात राज्य से कई छात्र एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए अन्य राज्यों में दाखिला लेते हैं। 2007 में राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया कि ऐसे छात्र बिहार में पीजी पढ़ाई के लिए टेस्ट नहीं दे सकते, जबकि महाराष्ट्र सहित अन्य राज्यों में ऐसी कोई बंदिश नहीं हैं। डाक्टरों के विरोध पर पूर्व स्वास्थ्य मंत्री नंदकिशोर यादव ने एक साल पहले इस नियम को समाप्त करने की घोषणा की, परन्तु इस संबंध में अब तक कोई फैसला नहीं लिया जा सका है। सूत्रों ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग ने इस मामले से संबंधित संचिका विधि विभाग को भेजी है। महाधिवक्ता अभी इसका अध्ययन कर रहे हैं। इस बीच, बिहार में पीजी में दाखिले के लिए 23 जनवरी को परीक्षा आयोजित है। 4 दिसंबर से आवेदन पत्र मिलने आरंभ हो गए हैं। फार्म 20 दिसंबर तक जमा होंगे। प्रदेश में इस समय पीजी कोर्स में करीब 400 सीटें हैं। डेंटल और आयुर्वेद की सीटें मिलाकर यह संख्या 499 है। सीबीएसई टेस्ट पास कर करीब 200 से अधिक बिहारी छात्र हर साल राज्य से बाहर एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त करते हैं। बिहार राज्य स्वास्थ्य सेवा संघ के संयोजक डा.अजय कुमार ने कहा कि प्रदेश में विशेषज्ञ डाक्टरों की काफी कमी है(दैनिक जागरण,पटना,13.12.2010)।

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