राज्य में अनुदानित स्कूल और कॉलेजों के शिक्षकों का सरकारी नौकरी में आने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल की मंजूरी के बाद राज्य सरकार ने इनके सेवा नियम जारी कर दिए हैं। इन नियमों के तहत ऐसे शिक्षकों को ग्रामीण इलाकों में नियुक्ति दी जाएगी। उन्हें रिटायरमेंट तक ग्रामीण इलाकों में ही रहना होगा।
कार्मिक विभाग ने मंगलवार को राजस्थान स्वेच्छया ग्रामीण शिक्षा सेवा नियमों में यह प्रावधान किया है। इससे राज्य के अनुदानित 914 स्कूलों के 8500 शिक्षकों और 71 अनुदानित कॉलेजों के 825 शिक्षकों को लाभ मिलेगा।
अनुदानित शिक्षकों को सरकारी सेवा में लेने के लिए बनाए गए नियमों को राज्य मंत्रिमंडल ने एक माह पहले ही मंजूरी दी थी। नियमों के मुताबिक शिक्षकों से शपथ पत्र लिया जाएगा कि वे गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्था में सेवा की अवधि को जोड़ने के लिए दावा नहीं करेंगे।
स्क्रीनिंग से होगी भर्ती
अनुदानित शिक्षकों को सरकारी नौकरी में लेने के लिए दो कमेटियां बनाई गई हैं। ये कमेटियां कर्मचारियों की पात्रता की स्क्रीनिंग करेंगी। राज्य लोक सेवा आयोग के कार्यक्षेत्र के भीतर आने वाले पदों के मामले में स्क्रीनिंग आयोग के अध्यक्ष की कमेटी करेगी। उधर, राजस्थान अनुदानित कर्मचारी संघर्ष समिति ने कहा है कि इस मामले में मुख्यमंत्री से कर्मचारियों के हित में निर्णय लेने का आग्रह किया गया है।
सरकारी सेवा में समायोजन बनाम नियुक्ति से कर्मचारी खुद को ठगा हुआ महसूस न करें। इस समस्या के निदान के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से आग्रहकिया गया है कि वे हस्तक्षेप करके कर्मचारी हित में निर्णय लें।
देना होगा ये शपथ पत्र
*जिस पद पर कार्यरत हैं, वह स्वीकृत और सहायता प्राप्त पद है।
*ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूल, कॉलेजों में पदस्थापित होने के लिए सहमत हैं।
*सेवानिवृत्ति तक पदोन्नति के लिए दावा नहीं करेंगे। निर्धारित वेतन स्वीकार होगा।
*पदग्रहण से पहले की अवधि के लिए बकाया राशि देने का दावा नहीं करेंगे। बकाया उपार्जित अवकाशों के भुगतान या आगे जोड़े जाने का दावा नहीं करेंगे।
*भविष्य निधि की ऐसी राशि का दावा नहीं करेंगे जो पहले वेतन से काटी गई और संबंधित संस्था ने जमा नहीं कराई हो।
गैर सरकारी सहायता प्राप्त संस्था में सेवा की कालावधि को जोड़ने के लिए दावा नहीं करेंगे(दैनिक भास्कर,जयपुर,1.12.2010)।
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