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17 दिसंबर 2010

छत्तीसगढ़ःप्रधान पाठक पदोन्नति प्रक्रिया पर हाईकोर्ट की रोक

हाईकोर्ट ने प्रदेश के स्कूलों में प्रधानपाठकों की भर्ती के लिए आयोजित परीक्षा और नियुक्ति की पूरी प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

कोर्ट ने गुरुवार को दिए आदेश में कहा है कि धमतरी, जांजगीर, बेमेतरा, कवर्धा सहित प्रदेश के जिन जिलों में परीक्षा होनी है, वहां परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी और जहां परीक्षा के बाद चयन और नियुक्ति प्रक्रिया शुरू हो चुकी है,वहां नियुक्ति पर फिलहाल पाबंदी रहेगी। पूरी प्रक्रिया में हो रही भयानक गड़बड़ियों से झल्लाई अदालत ने कहा कि प्रदेश में शैक्षणिक व्यवस्था को लगवा मार गया है। मामले की अगली सुनवाई जनवरी के पहले सप्ताह में होगी।

हेडमास्टर भर्ती परीक्षा और चयन प्रक्रिया में जिले सहित पूरे प्रदेश में गड़बड़ियों की शिकायत मिल रही है। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें भर्ती नियमों, आरक्षण, सूची जारी करने में गड़बड़ी आदि का मामला उठाया गया है।


ऐसे ही एक मामले में मुंगेली निवासी मोहित तिवारी व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि वे बिलासपुर जिले में आयोजित हेडमास्टर भर्ती परीक्षा में पास हुए और 8 नवंबर 2010 को जारी पहली चयन सूची में उनका नाम भी था। 

इसके अनुसार उन्हें नियुक्ति मिली और उन्होंने ज्वाइन भी कर लिया। 12 दिन बाद ही पहली सूची निरस्त कर दी गई और नई सूची जारी हुई। उसमें भी उनका नाम था, लेकिन इस सूची को भी निरस्त कर तीसरी सूची जारी की गई, जिसमें पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने की वजह से याची समेत सामान्य वर्ग के 145 लोगों के नाम हटा दिए गए। 

कोई साफ नियम ही नहीं 
हाईकोर्ट में दायर याचिकाओं में इस पर आपत्ति जताई गई है कि शासन द्वारा हेडमास्टर परीक्षा के लिए कोई स्पष्ट मापदंड तय नहीं किए गए। यही स्पष्ट नहीं है कि यह प्रमोशन परीक्षा है या सीधी भर्ती। 

अगर सीधी भर्ती है तो निर्धारित योग्यता पूरी करने वाले सभी लोगों को शामिल होने की अनुमति दी जानी चाहिए। परीक्षा में विकलांग वर्ग के आवेदकों को आरक्षण न देने को भी चुनौती दी गई है। इन सब मामलों में शासन और शिक्षा विभाग को नोटिस जारी हो चुके हैं। 

लगातार उजागर हुईं गड़बडियां शिक्षाकर्मियों को प्रधानपाठक बनाने में हो रहे इस गड़बड़ी पर राज्य शासन ने भी सख्त रवैया अपनाया है और शिक्षामंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस प्रकरण की फाइल मंगवाने के बाद अफसरों को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने को कहा है।

प्रमोशन या सीधी भर्ती
याचिकाकर्ताओं ने शासन द्वारा भर्ती के लिए अपनाई जा प्रक्रिया पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि पहले शासन ने इसे प्रमोशन बताया फिर सीधी भर्ती बताया जा रहा है। इसके अलावा परीक्षा में भी कई गड़बड़ियां की गई हैं। सुनवाई के बाद जस्टिस प्रीतिंकर दिवाकर की सिंगल बेंच ने हेडमास्टरों की नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा और नियुक्ति प्रक्रिया पर रोक लगा दी। 

जवाब नहीं दे पाए संचालक 
प्रधान पाठक भर्ती परीक्षा के नियमों को चुनौती देते वाली याचिकाओं पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने स्कूल शिक्षा सचिव एमके राउत को उपस्थित होकर जवाब देने को कहा था। इससे पहले विभाग द्वारा कई बार समय लेने के बाद भी कोर्ट के नोटिस पर जवाब प्रस्तुत नहीं किया गया था। 

शिक्षा सचिव की जगह लोक शिक्षण संचालक केआर पिस्दा उपस्थित हुए। कोर्ट ने इस मामले में शासन द्वारा कोई एक नियम तय न कर पाने और भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी पर नाराजगी जताते हुए सवाल किए, जिनका संचालक कोई जवाब नहीं दे पाए(दैनिक भास्कर,बिलासपुर,17.12.2010)।

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