नर्सरी में दाखिले के लिए बच्चे की उम्र चार साल से ज्यादा होनी चाहिए। हाईकोर्ट के इस आदेश को दिल्ली सरकार और निजी स्कूल हवा में उड़ा चुके हैं। तीन और दो साल के बच्चों को भी दाखिला दिया जा रहा है। इस आरोप के साथ एक एनजीओ ने सरकार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की याचिका हाईकोर्ट में दाखिल की है। याचिका पर संभवतः गुरुवार को सुनवाई होगी।
सोशल ज्यूरिस्ट के अधिवक्ता अशोक अग्रवाल का कहना है कि एक जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने वर्ष २००७ में अशोक गांगुली कमेटी की सिफारिश पर प्री-प्राइमरी कक्षाओं में चार वर्ष से कम उम्र के बच्चों को दाखिला देने पर रोक लगा दी थी। तब सरकार ने २००८-०९ के शैक्षणिक सत्र में इस आदेश के पालन का विश्वास दिलाया था। मौजूदा समय में सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश को दरकिनार कर दिया। पब्लिक स्कूलों में तीन साल की उम्र में नर्सरी दाखिला दिया जा रहा है। कुछ स्कूल तो प्री-नर्सरी की आड़ में दो साल में ही दाखिला दे रहे हैं।
यह शिक्षा अधिनियम का सरासर उल्लंघन है। शिक्षा अधिनियम में स्पष्ट है कि पहली कक्षा में दाखिले के लिए बच्चे को ३१ मार्च तक पांच साल का होना आवश्यक है(नई दुनिया,दिल्ली,22.12.2010)।
नवभारत टाइम्स की रिपोर्टः
नर्सरी एडमिशन मामले में दिल्ली सरकार की गाइडलाइंस के खिलाफ हाई कोर्ट में दाखिल जनहित याचिका पर बुधवार को सुनवाई होगी। इस बीच संस्था सोशल जूरिस्ट की ओर से हाई कोर्ट में एक अवमानना याचिका भी दाखिल कर दी गई, जिसमें दिल्ली सरकार को सवालों के घेरे में लाया गया है। याची के मुताबिक सितंबर 2007 में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान निर्देश दिए गए थे कि फॉरमल स्कूल सिस्टम में बच्चे की एंट्री की उम्र 4 साल होनी चाहिए लेकिन अभी नर्सरी में 3 साल के बच्चे को एडमिशन दिया जा रहा है। याची का कहना है कि पूर्व सीबीएसई अध्यक्ष अशोक गांगुली की कमिटी ने कहा कि प्री प्राइमरी स्कूल की अवधि एक साल की होनी चाहिए और चार साल के बच्चे को इसमें एडमिशन मिलना चाहिए। दिल्ली सरकार ने उस समय हाई कोर्ट में दिए हलफनामे में गांगुली कमिटी की सभी सिफारिशें मानने की बात कही थी लेकिन उम्र के मामले में अभी भी चार साल का नियम लागू नहीं किया गया है। इस अवमानना याचिका पर गुरुवार को सुनवाई हो सकती है।
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