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13 दिसंबर 2010

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय के एमबीबीएस फर्जीवाड़े की जांच रिटायर्ड जज से

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय में हुए एमबीबीएस फर्जीवाड़े की जांच हेतु भोपाल की सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश ने हामी भर दी है। वह दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में जांच हेतु विवि आएंगी। जांच तकरीबन 4 से 5 दिनों तक चलेगी,तब तक वह यहीं विवि गेस्ट हाउस में ही रुकेंगी।

ज्ञातव्य हो कि विगत माह एमबीबीएस फाइनल व फस्र्ट ईयर की कॉपियों में शिक्षकों के जाली हस्ताक्षर, एक नंबर की दो कॉपियों सहित अंकों में भारी हेरफेर होने का खुलासा हुआ था। यही वजह थी कि उक्त परीक्षाओं का परिणाम रोकते हुए कॉपियों को सील कर दिया गया है। उक्त फर्जीवाड़े की जांच विवि प्रशासन सेवानिवृत्त न्यायाधीश से कराना चाह रहा था।


विवि ने पत्राचार कर कई सेवानिवृत्त न्यायाधीशों से जांच कराने हेतु अनुमति चाही थी। सफलता स्वरूप विवि को भोपाल की सेवानिवृत्त न्यायाधीश सुश्री प्रेमलता प्रधान ने जांच हेतु सहमति दे दी है। हालांकि अभी उनके आने की तिथि सुनिश्चित नहीं हुई है, लेकिन उन्होंने बता दिया है कि वह दिसम्बर के अंतिम सप्ताह मेंविवि आएंगी। उनके साथ जांच में प्रस्तुत अधिकारी के रूप में उपकुलसचिव परीक्षा रवीन्द्र सिंह काकोडिया व बतौर सदस्य डॉ. जेएम केलर कार्य करेंगे।

छूट रहा एम्स
इधर एमबीबीएस फाइनल का परीक्षा परिणाम घोषित न होने पर उन बेकसूर छात्रों ने नाराजगी जाहिर की है, जिनका इस घोटाले से कोई लेना देना नहीं है। छात्रों ने बताया कि यदि दिसंबर के पहले उनके परिणाम घोषित न हुए तो पूरा साल पिछड़ जाएगा। 

छात्र राजकुमार,ऋषि,अतुल,धीरज आदि ने बताया कि जनवरी के प्रथम सप्ताह में एम्स की परीक्षा है,लेकिन परिणाम घोषित न होने पर छात्र उक्त परीक्षा में शामिल नहीं हो पाएंगे। छात्रों ने दोषी छात्रों को छोड़कर बाकी सभी के परिणाम घोषित करने की मांग परीक्षा कंट्रोलर से की।

जांच के कई बिन्दु
दिसम्बर के अंतिम सप्ताह में सेवानिवृत्त महिला न्यायाधीश आ रही हैं। जांच के कई बिन्दु हैं, वह पूरी जांच करने के बाद ही विवि से जाएंगी। उनके रुकने की व्यवस्था विवि करेगा-डॉ.एसएस राणा,परीक्षा कंट्रोलर(दैनिक भास्कर,जबलपुर,13.12.2010)

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