बुंदेली भाषा का इतिहास 1100 वर्ष से अधिक पुराना है तथा इस भाषा को चालीस जिलों में बोला जाता है, फिर भी यह संविधान में बोली ही कहलाती है। इसे भाषा का दर्जा प्राप्त होना चाहिए। यह बात अखिल भारतीय बुंदेली साहित्य एवं संस्कृति परिषद के अध्यक्ष कैलाश मड़वैया ने मानस भवन में आयोजित समारोह में कही। रविवार को परिषद द्वारा बुंदेली भाषा के मानक कवि ईसुरी का जन्म शताब्दी समारोह एवं वार्षिक सम्मेलन आयोजित किया गया। समारोह में मधुकर शाह बुंदेल को बुंदेल श्री अलंकरण से सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में रानी झांसी के तोपची रहे कादर खानदान के परिजनों ने लोगों का ध्यान खींचा। इस अवसर पर फागों की प्रस्तुति लोकगायिका सावित्री तिवारी ने दी(दैनिक जागरण,जासि,13.12.2010)।
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