पूर्वोत्तर रेलवे की एक चूक का खामियाजा 80 रेल कर्मचारी भुगत रहे हैं। वेतन विसंगति ने वरिष्ठों को कनिष्ठ बना दिया है। छठा वेतनमान लागू होने के बाद भी वरिष्ठ अपने कनिष्ठों से कम वेतन पा रहे हैं। उन्हें एमएसीपी का लाभ भी नहीं मिल पा रहा। ग्रेड पे और पदोन्नति भी प्रभावित हो रही है। सूत्रों के मुताबिक, 1979 के बाद पूर्वोत्तर रेलवे में एएसएम पद पर भर्ती कर्मचारियों का ग्रेड पे वेतनमान 2800, 4200, 4600 और 4800 रुपये हो गया, जबकि इसके पहले भर्ती कर्मियों का वेतनमान 2400, 2800, 4200 और 4600 रुपये तक ही रह गया है। इस प्रकार जूनियर 4800 ग्रेड पे पर पहुंच गये और सीनियर 4600 ग्रेड पर ही रुक गये। पूरी नौकरी में तीन पदोन्नति ही मिलती है। ऐसे में वरिष्ठों को पदोन्नति भी नहीं मिलेगी। 1979 तक रेलवे के सभी तात्कालिक 9 जोन में एएसएम की भर्ती ए टू सिग्नलर के रूप में होती थी। छह महीने के प्रशिक्षण में कोचिंग, गुड्स, ट्रांसपोटेशन और टेलीग्राफ की ट्रेनिंग दी जाती थी। भर्ती होने वाले कर्मियों का तात्कालिक वेतनमान 2800 रुपये था। 1979 के बाद नयी नीति के तहत एएसएम पद पर 2800 रुपये वेतनमान पर सीधी भर्ती होने लगी। नये आदेश से ए टू सिग्नलर ट्रेनिंग के तहत एएसएम पद पर गये कर्मचारी भी नये कटेगरी में आ गये लेकिन पूर्वोत्तर रेलवे में ए टू सिग्नलर ट्रेनिंग से भर्ती एएसएम का वेतनमान पिछले के अनुरूप 2400 रुपये ही रह गया। ऐसे में इस रेलवे में भी जो 1979 के बाद एएसएम पद पर भर्ती हुए उनका वेतनमान 2800 रुपये हो गया लेकिन सीनियर 2400 रुपये पर ही अटक गये(प्रेम नारायण द्विवेदी,दैनिक जागरण,गोरखपुर,3.12.2010)।
आदमी अपने दुःख से कम दुखी है बल्कि दूसरों कि खुशी देखकर ज्यादा दुखी है . कोई जयादा वेतन पा रहा है तो बाद में उसकी रिकवरी हो जायेगी
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