क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय मेरठ के हाईस्कज्ल परीक्षा प्रभारी की दर्जन भर कॉलेज संचालकों के साथ आगरा में हुई गिरफ्तारी के बाद फर्जीवाड़े की कहानी सामने आनी शुरू हो गई है। होटल में बाहरी छात्रों के नाम बोर्ड परीक्षार्थियों के रूप में बढ़ाने की सौदेबाजी चल रही थी। मामले में क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय के एक अधिकारी और स्थानीय विधायक पर भी शक की सुई उठ रही है। आगरा के होटल पार्क व्यज् में रविवार रात्रि पुलिस ने छापा मार यज्पी बोर्ड, मेरठ के लिपिक भारत सिंह और 12 कॉलेज संचालकों को पकड़ा था। इनके पास से दो लाख रुपये से ज्यादा बरामद हुए थे। पुलिस ने सोमवार को इन सभी को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर जेल भेज दिया। सज्त्रों के मुताबिक बोर्ड परीक्षा में बाहरी छात्रों को परीक्षा दिलाने का बड़ा गोरखधंधा चल रहा है। जनपद के 100 से ज्यादा कॉलेज ऐसे हैं, जो नवीं में भी फर्जी छात्रों के नाम पर ओएमआर शीट भरवा देते हैं। बाद में हाईस्कज्ल के लिए बाहरी छात्रों को प्रवेश देकर क्षेत्रीय कार्यालय में सेटिंग कर इनके नाम बदलवा दिए जाते हैं। इसके लिए 9वीं की ओएमआर शीट को दोबारा भरवा कर रिकार्ड में बदलवा दिया जाता है। लेट मान्यता लेने वाले कॉलेज भी इसी तरीके से अपने हाईस्कज्ल परीक्षार्थियों के नाम बढ़वाते हैं। सज्त्रों की मानें तो इस बार खाली ओएमआर शीट भरवाकर नाम बढ़वाने के लिए प्रति छात्र दो से तीन हजार रुपये वसज्ले जाने थे। साथ ही सामान्य संशोधन के लिए पिछले साल के 100 रुपए प्रति छात्र के रेट को बढ़ाकर 300 रुपये प्रति छात्र कर दिया गया था। आगरा में एक विधायक ने कॉलेज प्रबंधकों की बाबज् से बात कराई थी, जिसके बाद उसे आगरा बुलाया गया था। बाबज् को क्षेत्रीय कार्यालय के एक अधिकारी का संरक्षण भी हासिल है। मृतक आश्रित के रूप में नौकरी पाने वाला बाबज् एसेंट कार में चलता है। परिषद कार्यालय मेरठ परिसर में ही बने अधिकारी आवास में रह रहा है। सीओ असीम चौधरी ने बताया कि परीक्षार्थियों के नामों में संशोधन और बढ़ोत्तरी के लिए वसज्ली का मामला सामने आ रहा है, जांच शुरू कर दी गई है। मची खलबली, रात भर घनघनाते रहे फोन सज्त्रों के मुताबिक बाबज् की आगरा में सेटिंग कराने वाले विधायक ने बाबज् को रिहा कर मामला रफा-दफा कराने के लिए पुलिस अधिकारियों को फोन किए। परंतु तब तक मामला मीडिया की नजरों में आ चुका था। वहीं क्षेत्रीय बोर्ड कार्यालय के अधिकारी भी लगातार अपने सम्पर्को को फोन कर मामला खत्म कराने की मशक्कत में जुटे रहे(दैनिक जागरण,आगरा,21.12.2010)।
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