मर्चेट नेवी का मतलब है व्यावसायिक पोतों से जुड़े कामों को अंजाम देना? ये पोत समुद्र के रास्ते माल की ढुलाई समेत यात्रियों को इधर से उधर ले जाने का काम करते हैं। इनमें यात्री जहाज समेत कागरे लाइनर्स, टैंकर्स, कैरियर्स और गैर सैन्य इस्तेमाल वाले पोत शामिल हैं। इस क्षेत्र में कॅरियर रोमांचक जीवन की गारंटी होता है, जिसमें सुदूर किंतु खूबसूरत स्थानों की सैर बोनस का काम करती है। इसके अतिरिक्त आकर्षक वेतन-भत्ते और पदोन्नति के बेहतर अवसर मर्चेट नेवी में कॅरियर को आकर्षक व रोमांचक बनाते हैं। हालांकि यहां कॅरियर का मतलब घर से लंबे समय दूर रहकर कठिन परिश्रम से भी है, लेकिन अगर आपने होम सिकनेस पर काबू पा लिया, तो एक बेहतर भविष्य आपका इंतजार कर रहा है।
मर्चेट नेवी में ऐसे जहाज शुमार होते हैं जो यात्रियों, भारी-भरकम सामानों और ईंधन को इधर से उधर पहुंचाते हैं। ये जहाज भारतीय कंपनियों समेत विदेशी कंपनियों के होते हैं। इस क्षेत्र में आप अपने लिए मनमाफिक काम चुन सकते हैं। नेविगेशन ऑफीसर समेत रेडियो ऑफीसर या मैरीन इंजीनियर्स का।
काम का बंटवारा
मर्चेट नेवी में महत्वपूर्ण काम तीन क्षेत्रों से संबद्ध होते हैं। ये हैं डेक, इंजन रूम और सर्विस डिपार्टमेंट। इस लिहाज से देखें तो उन युवाओं के लिए यहां अवसरों और विकल्पों की कमी नहीं है, जो समुद्र में जीवन के ख्वाब देखते आए हों। डेक डिपार्टमेंट में कैप्टन, चीफ ऑफीसर, सेकंड ऑफीसर, थर्ड ऑफीसर और अन्य जूनियर स्टाफ काम करता है। वहीं इंजन डिपार्टमेंट में चीफ इंजीनियर, रेडियो ऑफीसर, इलेक्ट्रिकल ऑफीसर और अन्य जूनियर इंजीनियर अपनी-अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह करते हैं। एक तरफ जहां डेक और इंजन डिपार्टमेंट से जुड़े लोग जहाज व यात्रियों की सुरक्षा का ख्याल रखते हैं। दूसरी तरफ सर्विस डिपार्टमेंट में कार्यरत लोग यात्रियों और क्रू की सुख-सुविधाओं का जिम्मा संभालते हैं। इसके तहत जहाज की रसोई, लांड्री सर्विस, मेडिकल सप्लाई आदि काम आते हैं। इन सभी क्षेत्रों में शिपिंग कंपनियों को योग्य अभ्यर्थियों की दरकार होती है। भारतीय कंपनियों के अलावा विदेशी कंपनियां भी बड़े पैमाने पर इन क्षेत्रों में भर्तियां करती हैं।
मर्चेट नेवी में रोजगार हासिल करने की पहली शर्त होती है आत्मविश्वास। इसके बाद टीम के रूम में काम करने, रोमांच पसंद, कड़े मौसम में चुनौतियों का सामना करने, आशावादी नजरिया जैसे गुण आते हैं। आमतौर पर इच्छुक अभ्यर्थियों में यात्रा के प्रति अनुराग, कठिन श्रम से न घबराने की प्रवृत्ति, अनुकूलन का गुण और इनमें भी
सबसे ऊपर स्पोर्टिग स्पिरिट की दरकार नियोक्ता कंपनियों को रहती है।
नेविगेशन और मैरीन इंजीनियरिंग
मर्चेट नेवी में भी दो प्रमुख उपवर्ग हैं। ये हैं नेविगेशन और मैरीन इंजीनियरिंग। नेविगेशन ऑफीसर को नॉटिकल साइंस का तीन वर्षीय पाठ्यक्रम पूरा करना होता है। इसमें थ्योरी और प्रेक्टिकल दोनों ही शामिल हैं। इस पाठ्यक्रम के छात्रों को चाणक्य, मुंबई पर प्रशिक्षित किया जाता है। पाठ्यक्रम की समाप्ति पर अभ्यर्थी को मुंबई विश्वविद्यालय नॉटिकल साइंस में बीएससी की डिग्री प्रदान करता है।
इस कोर्स को सफलतापूर्वक करने के बाद कैडेट ऑफीसर को डेक डिपार्टमेंट में एक वर्ष तक काम करना होता है। इस अवधि के बाद ही कांपीटेंसी में सेकंड मेट सर्टिफिकेट के लिए आवेदन कर सकता है। इस अवधि में अभ्यर्थी को स्टायपेंड दिया जाता है।
मैरीन इंजीनियर्स को कोलकाता स्थित द मैरीन इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (एमईआरई) में प्रशिक्षण दिया जाता है। पहले इसी संस्थान को डॉयरेक्टोरेट ऑफ मैरीन इंजीनियरिंग ट्रेनिंग (डीएमईटी) के नाम से जाना जाता था। इन दोनों ही संस्थानों में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा और फिर साक्षात्कार होता है।
अवसर कम नहीं
जहाज पर रोजगार के विस्तृत अवसर मौजूद हैं। आपको बस अपनी रुचि के अनुरूप उनमें से किसी का चयन भर करना है। हालांकि कुछ रोजगार ऐसे भी हैं, जिसके लिए अनुभव की दरकार होती है। आप उन्हें तभी अपना सकते हैं, जब आपके पास अपेक्षित अनुभव हो।
जिम्मेदारियों का बंटवारा
जहाज का मुखिया कैप्टन को माना जाता है, जिसकी जिम्मेदारी न सिर्फ जहाज की सुरक्षा होती है, बल्कि उसपर सवार यात्रियों, क्रू और माल की सुरक्षा का दारोमदार भी उसी पर होता है।
फर्स्ट मेट, द सेकंड इन कमांड यानी कैप्टन का दायां हाथ होता है। वह कागरे प्लानिंग के साथ-साथ जहाज के परिचालन में मदद करता है। फस्र्ट मेट ही डेक
कैडेट्स, डेक क्रू की ड्यूटियों का निर्धारण करता है। एक तरह से डेक पर हर तरह के अनुशासन की जिम्मेदारी उसकी ही होती है।
सेकंड मेट की जिम्मेदारी में सभी मेल चैक करना और परिचालन के उपकरणों का रख-रखाव समेत नेविगेशन चार्ट्स को व्यवस्थित और अच्छी हालत में रखना
होता है। थर्ड मेट पर सुरक्षा उपकरणों का रख-रखाव शामिल होता है। इसमें लाइफ बोट्स, अग्निशमन यंत्र और सिग्नल प्रणाली से जुड़े यंत्र शामिल होते हैं। इसके अलावा डेक स्टाफ रेटिंग्स के आधार पर भी खास जिम्मेदारियां सुनिश्चित करता है।
कैसे जाएं मर्चेट नेवी में
योग्यता: नॉटिकल साइंस और मैरीन इंजीनियरिंग में दाखिले की न्यूनतम योग्यता 10+2 या उसके समकक्ष परीक्षा पास होना है। अभ्यर्थी को उक्त परीक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्य विषय के साथ उत्तीर्ण की होनी चाहिए। इसके अलावा अभ्यर्थी को सी सर्विस के तहत मेडिकल फिटनेस टेस्ट पास करना होता है। आंखों की दृश्यता 6/6 से कम नहीं होनी चाहिए। इच्छुक अभ्यर्थी को कलर ब्लाइंडनेस का शिकार भी नहीं होना चाहिए।
आगे की प्रक्रिया: नेविगेशनल और इंजीनियरिंग वर्ग से मर्चेट नेवी में प्रवेश करने के इच्छुक अभ्यर्थी को नॉटिकल साइंस में बैचलर्स की डिग्री प्राप्त करनी पड़ती है। इसके बाद अन्य स्तरों पर प्रशिक्षण के बाद उन्हें प्रवेश मिलता है। सीधा प्रवेश: मर्चेट नेवी में सीधा प्रवेश भी संभव है। इसके लिए फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ्स विषयों से
बारहवीं उत्तीर्ण छात्र डेक कैडेट्स के तौर पर प्रवेश पा सकते हैं। मैकेनिकल/इलेक्ट्रिकल/टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग में बैचलर्स डिग्री धारी अभ्यर्थी इंजन कैडेट/ फिफ्थ इंजीनियर/ जूनियर इंजीनियर/ के रूप में मर्चेट नेवी में प्रवेश पा सकते हैं। हालांकि इसके पूर्व उन्हें प्रारंभिक सी-ट्रेनिंग करनी पड़ती है। इसमें दक्ष होने पर ही प्रवेश दिया जाता है(दैनिक भास्कर,13.12.2010)।
बहुत अच्छी जानकारी। आभार।
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