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18 दिसंबर 2010

बिहार में हर साल खुलेंगे एक हज़ार स्कूल

बिहार में शिक्षा स्तर सुधारने व बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने शुक्रवार को कई अहम घोषणाएं की। सरकार ने हर वर्ष एक हजार हाईस्कूल खोलने का लक्ष्य के साथ ही नौवीं से बारहवीं तक की छात्राओं को भी स्कूल ड्रेस के लिए पैसा देने का फैसला किया है। अभी तक आठवीं कक्षा तक की छात्राओं को ही पैसा मिलता है। छात्राओं को पोशाक के लिए सात सौ के बजाए एक हजार रुपये मिलेंगे। कक्षा एक से आठ तक के बच्चों को भी पोशाक के लिए पैसा मिलेगा। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में शुक्रवार को मानव संसाधन विभाग की हुई समीक्षा बैठक में कई अहम फैसले हुए। सरकार ने तय किया है कि जिन मध्य विद्यालयों के पास एक एकड़ या उससे अधिक जमीन है, उसे उत्क्रमित कर हाईस्कूल बनाया जायेगा। प्रदेश के सभी अच्छे महाविद्यालयों को सेंटर आफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जायेगा। विद्यार्थियों के प्रोत्साहित के लिए सरकार मैट्रिक व इंटर परीक्षा में प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण होने वाले विद्यार्थियों के लिए मुख्यमंत्री मेधा पुरस्कार योजना शुरू करने जा रही है। मैट्रिक परीक्षा में फ‌र्स्ट टॉपर को अब पच्चीस हजार रुपये का वजीफा मिलेगा। इसके बाद के नौ विद्यार्थियों (टॉपर) को पंद्रह-पंद्रह हजार रुपये की राशि दी जायेगी। जिला टॉपरों को दस हजार रुपये का नगद इनाम मिलेगा। साइकिल के लिए भी अब दो हजार की जगह मिलेगा ढाई हजार रुपये मिलेंगे। स्कूली बच्चों को शैक्षिक भ्रमण के लिए मिलने वाली राशि में भी बढ़ोतरी हुई है। अब प्रति स्कूल पांच हजार की जगह दस हजार रुपये दिए जाएंगे। सरकार ने यह तय किया है कि मानव संसाधन विभाग के अतिरिक्त दूसरे अन्य विभागों से मिलने वाली छात्रवृत्ति की देखरेख भी अब मानव संसाधन विभाग ही करेगा। विद्यार्थियों से जुड़े सभी महकमों के छात्रावासों का जिम्मा मानव संसाधन विभाग को सौंपा जायेगा। गरीब बच्चों के लिए प्रमंडलीय मुख्यालयों में बाल भवन खोले जाएंगे। मध्याह्न भोजन के संबंध में सरकार ने यह फैसला लिया है कि सभी जिलों में अब इसकी जिम्मेवारी बिहार प्रशासनिक सेवा के अफसरों को सौंपी जायेगी। बंद पड़े शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र दोबारा खोले जायेंगे। महादलित टोलों में स्थापित उत्थान केंद्र और अल्पसंख्यक टोलों के तालीमी मरकज में विद्यार्थियों के लिए अब आवासीय सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,18.12.2010)।

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