उच्च शिक्षा में विस्तार और आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को मदद के लिए एक और वित्तीय निकाय का रास्ता खुलने के आसार दिख रहे हैं। यदि सब कुछ ठीक रहा तो राष्ट्रीय शिक्षा वित्त निगम बनाने की कोशिशें मुकाम तक पहंुच सकती हैं। पूर्व में निगम के गठन के औचित्य पर ही सवाल उठाने वाले योजना आयोग के रुख में अब नरमी के संकेत हैं और अब उसने इस पर सैद्धांतिक सहमति जता दी है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल और केंद्रीय योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया के बीच मंगलवार को हुई बातचीत के बाद राष्ट्रीय शिक्षा वित्त निगम (एनईएफसी) के बनने के आसार बढ़ गए हैं। सूत्रों के मुताबिक आयोग ने पूर्व में जिन बिंदुओं को उठाकर इस प्रस्तावित नए वित्तीय निकाय को लेकर गठन को गैरजरूरी करार दे दिया था, सिब्बल ने भविष्य में उच्च शिक्षा के विस्तार की चुनौतियों का हवाला देकर उसको स्पष्ट कर दिया है। लिहाजा आयोग ने एनईएफसी के गठन पर सैद्धांतिक रजामंदी दे दी है। अलबत्ता विस्तृत प्रस्ताव पर फैसला बाद में में होगा। सूत्र बताते हैं कि चूंकि 11वीं योजना में अब एक साल से थोड़ा ही ज्यादा समय बचा है। ऐसे में निगम के गठन पर अमल का मामला 12वीं योजना में जा सकता है। गौरतलब है कि मानव संसाधन विकास मंत्रालय बीते लगभग साल भर से प्रस्तावित राष्ट्रीय शिक्षा वित्त निगम के एजेंडे पर लगा हुआ है। कुछ महीने पहले योजना आयोग ने मंत्रालय के इस प्रस्ताव को औचित्यहीन करार देते हुए इस सिरे से ही खारिज कर दिया था। इतना ही नहीं, सिब्बल ने इससे पहले वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी का भी दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्होंने भी इस पर पहले योजना आयोग की रजामंदी का सुझाव दिया था। बताते हैं कि सिब्बल व मोंटेक की इस चर्चा के दौरान मंत्रालय की ओर से प्रस्तावित 14 नवोंवेषी (इनोवेटिव) विश्वविद्यालयों को बनाने के मामले में भी सहमति बन गई है। अलबत्ता ये सभी 14 विश्वविद्यालयों का भी 11वीं योजना में बन पाना मुश्किल है, इसलिए उनमें कुछ तो चालू योजना में बनेंगे, जबकि बाकी 12वीं योजना में बनाए जाएंगे(दैनिक जागरण,राष्ट्रीय संस्करण,3.2.11)।
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