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03 फ़रवरी 2011

गरीब कोटे की दाखिला लिस्ट साइट पर डालनी होगी

निजी व सरकारी स्कूल ही नहीं बल्कि नगर निगम से मान्यता प्राप्त स्कूलों को भी आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग की सीटों के दिशा-निदेशों को मानना होगा। यदि निगम से मान्यता प्राप्त स्कूल इन निर्देशों का उल्लंघन करते हैं तो उन्हें खिलाफ सरकार सख्त कार्रवाई करेगी। वहीं, आर्थिक पिछड़े वर्ग के बच्चों के दाखिले की लिस्ट अब हर स्कूल को शिक्षा निदेशालय की वेबसाइट पर डालनी होगी। स्कूलों से प्राप्त लिस्ट के मुताबिक सरकार इस वर्ग के बच्चों के लिए एक आईडी नंबर बनाएगी जिससे कि इस वर्ग के तहत दाखिला पाए बच्चों का खर्च सरकार स्कूलों को दे सके। मुख्यमंत्री शीला दीक्षित की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में सभी स्कूलों को यह निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने एमसीडी को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वह उन प्राइमरी पब्लिक स्कूलों में गरीब कोटे की सीटों के दिशा-निर्देश लागू करने को कहे जो कि निगम से मान्यता लिए हुए हैं। पूरी प्रक्रिया के लिए बुलाई गई इस समीक्षा बैठक में दिल्ली के शिक्षा मंत्री, प्रधान सचिव राकेश मोहन, प्रधान सचिव विधि एसपी गर्ग, निगमायुक्त केएस मेहरा, शिक्षा निदेशक पी कृष्णमूर्ति और निगम के शिक्षा निदेशक भी मौजूद थे। बैठक के बाद मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने बताया कि आरटीई एक्ट लागू होने जाने के बाद यह जरूरी हो गया है कि गरीब वर्ग की प्रवेश प्रक्रिया को सही तरीके से लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि निगम को यह भी निर्देश दिया गया है कि ऐसे दाखिले सुनिश्चित किए जाएं। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों को लाभ सुनिश्चित कराना चाहती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अल्पसंख्यक स्कूलों पर यह कोटा लागू होता है। लिहाजा स्कूल अपनी मनमानी नहीं कर सकते हैं।

उधर,एमसीडी ने 773 प्राथमिक विद्यालयों को नोटिस जारी किए हैं जो उससे मान्यता प्राप्त हैं। नोटिस के माध्यम से पूछा गया है कि उनके यहां शिक्षा प्राप्त करने के अधिकार के अंतर्गत समाज के कमजोर वर्गों के लिए निर्धारित 25 प्रतिशत कोटे के कार्यान्वयन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं? उन्हें यह भी बताने के लिए कहा गया है कि वे नियमानुसार इस कोटे को पूरा करें। शिक्षा समिति के अध्यक्ष महेंद्र नागपाल ने बताया कि जो विद्यालय कोटे का कार्यान्वयन नहीं करेंगे उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। डीडीए से कम राशि राशि पर जमीन लेने वाले विद्यालयों को पहले ही नोटिस जारी किए जा चुके हैं। उनसे भी पूछा गया है कि कोटे के कार्यान्वयन के लिए क्या कदम उठाए हैं और कमजोर वर्ग के कितने बच्चों को प्रवेश दिया है?(अमर उजाला,दिल्ली,3.2.11)

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