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04 फ़रवरी 2011

ग्वालियरःएमआईटीएस से आसानी से नहीं मिलेगी एमटेक की डिग्री

एमआईटीएस से एमटेक कर रहे अंतिम सेमेस्टर के छात्रों को अब डिग्री हासिल करने के लिए अधिक मशक्कत करनी पड़ेगी। दरअसल, डिजरटेशन (शोध पत्र) प्रस्तुत करने के नियम कड़े कर दिए गए हैं। इसके तहत अब टेक्निकल नेशनल जर्नल्स में कम से कम दो पेपर प्रकाशित होने या अंतरराष्ट्रीय अथवा राष्ट्रीय सेमिनार में दो प्रजेंटेशन होने के बाद ही डिग्री दी जाएगी।

उल्लेखनीय है कि एमआईटीएस में एमटेक अंतिम सेमेस्टर के छात्र ऐसे डिजरटेशन (शोध पत्र) प्रस्तुत करते थे, जिनकी गुणवत्ता ठीक नहीं थी। इसकी जांच संस्थान के निदेशक डा. संजीव जैन ने की थी। इसको देखते हुए डा. जैन ने निर्देश दिए हैं कि डिजरटेशन तभी मान्य किया जाएगा, जब छात्रों द्वारा किसी नेशनल जर्नल एवं अन्तरराष्ट्रीय या राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार में डिजरटेशन में लिखित मैटर प्रस्तुत किया गया होगा।


इतना ही नहीं निदेशक ने शिक्षकों को भी हिदायत दी है कि जिनके निर्देशन में छात्र डिजरटेशन तैयार करते हैं, उन्हें भी मेहनत करनी होगी, ताकि छात्र गुणवत्ता युक्त डिजरटेशन प्रस्तुत कर सकें। ज्ञात हो कि एमटेक अंतिम सेमेस्टर में प्रत्येक छात्र को 200 अंक का डिजरटेशन तैयार करना होता है।

150 छात्रों को करनी पड़ेगी
नई व्यवस्था के तहत संस्थान से विभिन्न ब्रांचों के लगभग 150 छात्र एमटेक कर रहे हैं, जो नई व्यवस्था के दायरे में आएंगे।

रिसर्च पेपर में करनी होगी मशक्कत
रिसर्च के क्षेत्र में गुणवत्ता आए इसी को ध्यान में रखते हुए एमटेक अंतिम सेमेस्टर के छात्रों पर यह नियम लागू किया गया है कि जब तक उनके द्वारा किसी नेशनल जर्नल में रिसर्च पेपर प्रकाशित नहीं करवाए जाते तब तक उनको डिजरटेशन के अंक नहीं दिए जाएंगे-डॉ. संजीव जैन, निदेशक एमआईटीएस(दैनिक भास्कर,ग्वालियर,4.2.11)

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