प्राइवेट अंग्रेजी स्कूल तो लगातार अभिभावकों का शोषण कर ही रहे हैं, माध्यमिक शिक्षा परिषद से संबद्ध सरकारी स्कूल भी पीछे नहीं हैं। जिले के ५७ और प्रदेश के २२१२ सरकारी विद्यालयों पर आरोप है कि उन्होंने छात्रों से निर्धारित फीस से तीन गुना रकम ली। इन विद्यालयों में तैनात ऐसे शिक्षक जिन्हें प्रबंधकों ने अपनी सुविधा से मनमानी रख लिया, उनका वेतन अतिरिक्त की फीस की रकम से दिया गया। सरकार स्कूल के सभी शिक्षकों के वेतन, सुविधाओं का बोझ उठा रही है लेकिन उसके बाद भी प्रबंधक के चहेतों के लिए पूरे वर्ष अभिभावकों की जेब कटी। इस मामले में इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर, आगरा, मेरठ, झांसी से छह हजार से अधिक शिकायतें माध्यमिक शिक्षा विभाग को मिलीं।
अधिकारियों ने जिला विद्यालय निरीक्षकों से रिपोर्ट मांगी जिसमें आरोप सही पाए गए। अब सत्र लगभग खत्म होने को है तो प्रधानाध्यापकों को नोटिस जारी किया गया है। प्रधानाध्यापकों से स्पष्टीकरण मांगा गया है कि फीस की जो रकम निर्धारित है, उससे अधिक वसूलने का आदेश किसने दिया और इस बारे में अधिकारियों को सूचना क्यों नहीं दी गई। जिला विद्यालय निरीक्षकों से कहा गया है कि ऐसे विद्यालयों में जितने फर्जी शिक्षक काम कर रहे हैं, उनका ब्योरा तैयार कर शासन को भेजा जाए ताकि उसके अनुरूप कार्रवाई हो सके। माध्यमिक शिक्षा निदेशक संजय मोहन का कहना है कि सरकारी विद्यालयों को मनमानी फीस लेने का अधिकार नहीं है, प्रधानाचार्यों से इस मामले में जवाब तलब किया गया है(अमर उजाला,इलाहाबाद,18.4.11)।
सब एक से बढ़कर एक हैं!
जवाब देंहटाएंभगवान हनुमान जयंती पर आपको हार्दिक शुभकामनाएँ!