हमेशा विवादों में रही एचपीयू की ओर से कराई जाने वाली सीपीएमटी परीक्षा इस बार भी सवालों के घेरे में आ गई है। प्रश्नों पर विवाद के कारण पहले जो परीक्षा 800 अंकों की थी, अब वह घटकर 756 अंकों की कर दी गई है। इसी के आधार पर 14 जून को मेरिट तय की जाएगी।
परीक्षा से पहले यूनिवर्सिटी ने सेवन सीरीज का चक्रव्यूह बनाकर दावा किया कि इस बार कोई गड़बड़ी नहीं होगी। परीक्षा के बाद जब कुछ छात्र 15 प्रश्नों पर अपनी आपत्तियों को लेकर यूनिवर्सिटी पहुंचे तो उन्हें जवाब मिला कि प्रशासन के पास हर प्रश्न की ‘आंसर की’ मौजूद है। इस बारे में जब कुछ छात्रों ने भास्कर के माध्यम से मामला उठाया तो प्रशासन ने खुद को पाक साफ करार देकर उल्टे इन छात्रों को ही गलत करार दे दिया। लेकिन, इन सबके बावजूद यूनिवर्सिटी की लापरवाही जगजाहिर हो ही गई।
परीक्षा के करीब एक दर्जन प्रश्नों को तो डिलीट किया गया है, लेकिन करीब पांच प्रश्न ऐसे हैं जिन पर छात्र अपनी आपत्ति जता चुके हैं। यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा हो गया है कि विशेषज्ञों की टीम होने के बावजूद इतनी गलतियां कैसे हो गई। छात्रों के अनुसार करीब 15 प्रश्न ऐसे हैं जो या तो पुराने सिलेबस से आए हैं या फिर बाहर से डाले गए हैं।
15 प्रश्नों पर उठा था विवाद
परीक्षा के बाद कुछ छात्रों ने कैमिस्ट्री के 11, फिजिक्स के दो और बायोलॉजी के दो प्रश्नों पर सवाल खड़े किए थे।परीक्षा में बैठे सोलन के रोहित शर्मा, सुंदरनगर के पवन शर्मा, रामपुर के संजय, बिलासपुर के अरुण, मंडी के सुमित और कुमारसैन के अमित ने इस बारे में परीक्षा नियंत्रक से भी मुलाकात की थी।
परीक्षा नियंत्रक डॉ. नरेंद्र अवस्थी का कहना है कि जिन प्रश्नों पर विवाद था, उन्हें डिलीट कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि आपत्तियां ली जा रही हैं और 14 को मेरिट लिस्ट निकाली जाएगी। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के बाद ऐसा किया गया है। प्रश्न सही हैं, लेकिन कोर्ट का कहना है कि सवाल ‘वर्ड-टू-वर्ड’ सही होने चाहिए। 11 प्रश्नों को हटा दिया गया है। यह 4-4 अंक के थे(दैनिक भास्कर,शिमला,7.6.11)।
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