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25 मई 2012

आईआईटी टॉपर अर्पित अग्रवाल से जानिए सफलता के गुर

आईआईटी की तायारी में कब से लगें, यह स्टूडेंट की क्षमता पर निर्भर है। कुछ आठवीं-नौवीं से लग जाते हैं, तो कुछ 10वीं के बाद सीरियस होते हैं। अहम बात यह है कि अगर हम रैंक लाना चाहते हैं, तो हमें प्लानिंग के साथ तैयारी करने की जरूरत होती है। यह कहना है आईआईटी टॉपर अर्पित अग्रवाल का। 

अग्रवाल के मुताबिक हमें अपनी प्लानिंग को दो हिस्सों में बांटना चाहिए: 

लांग टर्म : लांग टर्म प्लानिंग का मतलब है बिगर पिक्चर को देखना यानी प्लानिंग में सारी चीजों को शामिल करना। जैसे कि हमें कब सिलेबस खत्म करना है, कब से रिवीजन करना है, अपनी खूबियों और खामियों को पहचानना। 

शॉर्ट टर्म : शॉर्ट टर्म प्लानिंग सब विशेष जरूरतों को ध्यान में रखकर करते हैं। इसमें रिवीजन से लेकर पिछले बरसों के सवालों को पूरी तरह से हल करना भी शामिल है। 

सक्सेस के लिए क्या हो स्टेप 
एंट्रेस एग्जाम में अच्छा करने के लिए सैंपल पेपर्स की रेग्युलर प्रैक्टिस जरूरी है। सैंपल पेपर्स की मदद से खास तरह के सवालों के लिए स्ट्रेटजी बनाने में मदद मिलती है। इसका फायदा अल्टीमेटली एग्जाम में मिलता है। इससे ध्यान केंद्रित करने में भी मदद मिलती है। सक्सेस के लिए इस तरह स्टेप ले सकते हैं: 

- एनसीईआरटी की किताबें 9वीं से 12वीं तक ठीक तरह पढ़े। 

- अहम हिस्सों का नोट बनाएं और उसे बार-बार दोहराएं। 

- सवाल रेग्युलरली हल करें और कठिन सवालों को अलग से मार्क करें। - पिछले 10 साल के सवाल हल करें। 

सक्सेस का मूलमंत्र 
समय से एक प्लानिंग और मेथॉडिकल तरीके से तैयारी में जुटना ही सफलता का मूल मंत्र है। तीनों सब्जेक्ट पर बराबर ध्यान देना भी जरूरी है , चूंकि आपको तीनों ही सब्जेक्ट में एक मिनिमम कट - ऑफ फेस करना होता है। सभी सब्जेक्ट्स पर बराबर ध्यान देना तभी संभव है , जब आप सभी सब्जेक्ट्स को रोज पढ़ेंगे। आप किसी एक सब्जेक्ट के मजेदार या चैलेंजिंग लगने के बावजूद उसके पीछे न पड़े। देखा जाए तो यह आम गलती है और स्टूडेंट्स इस वजह से टाइम फ्रेम में सिलेबस पूरा नहीं कर पाते हैं। हमारी तैयारी की रणनीति में आईआईटी - जी सिलेबस के अनुसार चेप्टरों का वजन होना चाहिए। 

वन टाइम इवेंट नहीं 
यह कोई वन टाइम इवेंट नहीं है। यह तो लगातार चलने वाली प्रक्रिया है जो एक से दो साल लंबी होती है। फिटजी से कोचिंग और एमवीएन , फरीदाबाद से स्कूलिंग करने वाले अर्पित के मुताबिक सफलता के लिए यह भी जरूरी है कि आप अच्छे कोचिंग का चुनाव करें जहां आपको गाइड करने लायक टीचर्स हों। क्लास रेग्युलरली अटेंड करें और अपने टीचर्स से सुझावों को इमानदारी से फॉलो करें। लेकिन पढ़ाई सब्जेक्ट के हिसाब से ही करनी चाहि ए(निर्भय कुमार,नवभारत टाइम्स,दिल्ली,23.5.12)।

3 टिप्‍पणियां:

  1. आपके यहाँ ऐसी चीज पढकर कुछ ठीक नहीं लगा...

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  2. आपके ब्लॉग पर टिप्पणी का विकल्प भी चंद लोगों के लिए ही है। बड़ी समस्या है।

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