मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने कहा है कि देश में १८ से २४ वर्ष की आयु के महज १२.४ फीसदी विद्यार्थी ही विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेते हैं। इस दर को ३० फीसदी तक ले जाने के लिए हमें आने वाले वर्षों में करीब ८०० विश्वविद्यालयों और ३५ हजार कॉलेजों की जरूरत होगी।सिब्बल ने कहा है कि २१वीं सदी भौतिक संपदा की नहीं, बल्कि बौद्धिक संपदा की है। यह बौद्धिक संपदा स्कूलों और विश्वविद्यालयों में विकसित होती है। हमें इसी को ध्यान में रखते हुए युवाओं को विकसित करना होगा। मानव संसाधन विकास मंत्री ने शिक्षा पर बांग्लादेश, भूटान, भारत, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका के संसदीय संपर्क समूह की पहली बैठक के उद्घाटन मौके पर कहा कि जब विश्व अर्थव्यवस्था मंदी के दौर से गुजरती है तो विकसित देश विकासशील देशों की गरीबी की ओर ध्यान नहीं देते। इस तथ्य को विकासशील देशों को स्वीकार करना होगा और समझना होगा कि गरीबी को दूर करने का रास्ता शिक्षा ही है। उन्होंने कहा कि देश में १८ से २४ वर्ष की आयु के हर १०० में से महज १२.४ फीसदी विद्यार्थी ही विश्वविद्यालयों में प्रवेश लेते हैं। इस मामले में विश्व की औसत दर २३ फीसदी और विकसित देशों की दर ४० फीसदी है। सिब्बल ने कहा कि अगर भारत को ३० फीसदी का लक्ष्य हासिल करना है तो हमें आने वाले वर्षों में करीब ८०० विश्वविद्यालयों और ३५ हजार कॉलेजों की जरूरत होगी। अभी देश में करीब ४८० विश्वविद्यालय और २२,००० कॉलेज हैं।सिब्बल ने बांग्लादेश, भूटान, मालदीव, नेपाल और श्रीलंका समेत पड़ोसी देशों से आग्रह किया कि वे शिक्षा के क्षेत्र में सुधार के लिए क्षेत्रीय स्तर पर एक साझा लक्ष्य तैयार करें। इस दिशा में संवाद के लिए यूनेस्को कारगर भूमिका निभा सकती है।न कहा, २१वीं सदी भौतिक संपदा की नहीं, बल्कि बौद्धिक संपदा की है।
(नईदुनिया,दिल्ली,25.3.10)
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