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09 अप्रैल 2010

बिहार में पिछड़े इलाक़ों में 25 मॉडल कॉलेज खुलेंगे

बिहार के पिछड़े इलाकों में 25 माडल डिग्री कालेज खोले जायेंगे। विभागीय सूत्रों के अनुसार इन कालेजों की स्थापना के लिए केंद्र कुल खर्च का एक तिहाई उपलब्ध करायेगा। मिली जानकारी के अनुसार केंद्र जल्द ही राज्य सरकार के साथ इस पर एमओयू पर हस्ताक्षर करने वाला है। केंद्र ने जो नीति तय की है उसके मुताबिक ये कालेज उन पिछड़े जिलों में खोले जाने हैं जहां डिग्री कालेजों में नामांकन दर राष्ट्रीय दर 12.4 प्रतिशत से कम है। इससे आर्थिक मजबूरी वश जिला मुख्यालय तक नहीं जा पाने वाले इंटर पास छात्रों को अपने घर के समीप डिग्री की पढ़ाई करने का मौका मिल सकेगा। इस संबंध में पूछे जाने पर मानव संसाधन विकास विभाग के प्रधान सचिव अंजनी कुमार सिंह ने बताया कि सूबे के वैसे पिछड़े जिलों को चिह्नित कर लिया गया है जहां डिग्री कालेजों में नामांकन दर 11 प्रतिशत अथवा उससे भी कम है। माडल कालेज खोलने के लिए अररिया, औरंगाबाद, बांका, बेगूसराय, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, गोपालगंज, जमुई, कैमूर, कटिहार, खगडि़या, किशनगंज, लखीसराय, मधेपुरा, मधुबनी, नवादा, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढ़ी, सिवान, सुपौल तथा वैशाली जिले का चयन किया गया है। मिली जानकारी के अनुसार इस योजना के तहत केंद्रीय अनुदान राशि 2.67 करोड़ तय की गयी है। वैसे तो केंद्र विशेष दर्जा प्राप्त प्रदेशों को 50 फीसदी तक अनुदान प्रदान कर सकता है मगर इसकी अधिकतम राशि 4 करोड़ होगी। कालेजों के लिए संबंधित राज्य सरकार जमीन उपलब्ध करायेगी। कालेज का स्थापना व्यय सरकार को उठाना होगा। विभागीय सूत्रों के अनुसार विभाग कालेजों के लिए जमीन की व्यवस्था करने में लगा हुआ है। डिग्री कालेजों की स्थापना के लिए यूजीसी व मानव संसाधन विकास मंत्रालय राशि उपलब्ध करायेगा। मगर इसके लिए केंद्र को राज्य सरकार के साथ एमओयू पर दस्तखत करने होंगे। इस दिशा में विगत तीन माह में केंद्र के स्तर से कोई पहल नहीं हुई है।
(दैनिक जागरण,पटना,9.4.2010)

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