पटना उच्च न्यायालय ने ऐसे विश्र्वविद्यालयों को हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया है जिन्होंने अभी तक शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों की रिक्तियों के संबंध में राज्य सरकार को ब्यौरा नहीं सौंपा है। अदालत ने सुनवाई की पिछली तिथि को महाविद्यालय एवं विश्र्वविद्यालयों में आनुपातिक रिक्तियों की जानकारी राज्य सरकार को उपलब्ध कराने को कहा था। रिक्त पदों पर शिक्षकों की बहाली, संबंधित कालेज एवं यूनिवर्सिटी के कुल छात्रों के हिसाब से होनी है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्र एवं न्यायाधीश मिहिर कुमार झा की खंडपीठ ने गुरुवार को डा. विनय कुमार सिंह की लोकहित याचिका पर सुनवाई की। जिसमें बताया गया कि राज्य सरकार द्वारा सभी विश्र्वविद्यालयों से खाली पड़े शिक्षकों के पदों की सूची मांगी गयी थी किन्तु अभी तक जवाब नहीं मिल पाया है। केवल तिलका मांझी भागलपुर विश्र्वविद्यालय एवं बीएन मंडल विश्र्वविद्यालय से रिक्तियों के संबंध जानकारी मिल पायी है। याचिका में कहा गया था कि बड़े पैमाने पर कालेज एवं यूनिवर्सिटी में शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मचारियों का पद खाली है। इन्हें भरने की कबायद नहीं हो रही है। याचिका के वकील कृष्ण कांत सिंह का कहना था कि कुछ विश्र्वविद्यालयों में शिक्षकों के पद 20 साल से खाली हैं।
(दैनिक जागरण,पटना,9.4.2010)
(दैनिक जागरण,पटना,9.4.2010)
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