रांची स्थित श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान ने आम नागरिकों, खासकर युवक-युवतियों, को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में शानदार पहल की है।स केंद्र की स्थापना सरकारी अधिकारियों को प्रशिक्षण देने के लिए की गई थी । सभी राज्यों में ऐसे प्रशासनिक प्रशिक्षण केंद्र हैं लेकिन झारखंड के इस केंद्र ने अनूठा प्रयोग किया है । रांची स्थित श्री कृष्ण लोक प्रशासन संस्थान ने आम नागरिकों, खासकर युवक-युवतियों, को उनके अधिकारों और कानूनी प्रावधानों की जानकारी देकर बेहतर नागरिक बनाने की दिशा में शानदार पहल की है । पिछले छह महीनों के भीतर लगभग तीन हजार से ज्यादा युवाओं को तीन-तीन दिनों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है । इस वर्ष भी तीन हजार से ज्यादा लोगों को प्रशिक्षण देने की योजना है ।
एटीआई के नाम से मशहूर इस संस्थान की स्थापना वर्ष १९५२ में हुई थी । राजधानी के वीआईपी इलाके- मेयर्स रोड स्थित इस संस्थान के पास बहुत खूबसूरत भवन और छात्रावास है । यहां के पुस्तकालय में अत्यंत महत्वपूर्ण पुस्तकों एवं पत्र-पत्रिकाओं का संग्रह है । यह कैसा संस्थान है और यहां क्या होता है, इसकी जानकारी पिछले साल तक आम नागरिकों को बिल्कुल नहीं थी । अक्टूबर, २००९ में संस्थान के महानिदेशक अशोक कुमार सिंह ने पहली बार एटीआई को आम नागरिकों के लिए खोल दिया । अखबारों में विज्ञापन देकर इच्छुक नागरिकों से प्रशिक्षण हेतु आवेदन मांगे गए । देखते ही देखते, बड़ी संख्या में आवेदनों का भंडार लग गया । उनमें से निर्धारित मापदंड के आधार पर प्रशिक्षुओं का चयन करके एक बार में लगभग ३० से ४० प्रशिक्षार्थियों के चार-चार बैच बनाए गए । उन्हें तीन-तीन दिनों का प्रशिक्षण दिया गया । जरूरतमंद प्रशिक्षार्थियों को आवासीय सुविधा भी प्रदान की गई । बाद के दौर में विभिन्न शिक्षण संस्थानों तथा विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों से भी विद्यार्थियों के बैच बुलाए गए।
प्रशिक्षण का यह कार्यक्रम काफी सफल माना जा रहा है । सुबह नौ बजे से शाम साढ़े पांच बजे तक लगातार चलने वाले इस प्रशिक्षण को बोझिल नहीं बनने देना एक बड़ी चुनौती थी । खासकर, विभिन्न कानूनी और तकनीकी विषयों की जानकारी दिए जाने के दौरान प्रशिक्षुओं में अरुचि उत्पन्न होने की पूरी गुंजाइश थी लेकिन कई वजहों से ऐसा कोई नकारात्मक लक्षण देखने को नहीं मिला । एक तो इस प्रशिक्षण में हर विषय के लिए विशेषज्ञ अधिकारियों, प्रतिष्ठित विद्वानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं चर्चित अधिवक्ताओं को आमंत्रित किया गया । ऐसे व्यक्तित्वों के प्रति स्वाभाविक आकर्षण के कारण प्रशिक्षु पूरे मनोयोग से प्रशिक्षण में हिस्सा लेते हैं । साथ ही, एलसीडी प्रोजेक्टर पर पावर प्वाइंट प्रस्तुति के माध्यम से प्रशिक्षण के कारण दिलचस्पी बनी रहती है । सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त कमिश्नर के राज्य सलाहकार बलराम के अनुसार, एटीआई का यह कदम बेहद प्रगतिशील है । नागरिकों को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर चुनौतियों की जानकारी देना व अपने अधिकारों के प्रति सचेत करना एक सुखद पहल है । इससे युवा पीढ़ी को बेहतर नागरिक बनाने और झारखंड को नई दिशा देने में मदद मिल सकती है । जिन विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है, उनमें सबसे ज्यादा आकर्षण सूचना के अधिकार का है । युवाओं को इस कानून के प्रावधानकी जानकारी देने के साथ-साथ ग्लोबल वॉर्मिंग के बढ़ते खतरों के संबंध में दी जा रही जानकारियां और दस्तावेज बहुत उपयोगी हैं । झारखंड में भ्रष्टाचार के लगातार बढ़ते प्रभाव के आलोक में सामाजिक अंकेक्षण तथा भ्रष्टाचार उन्मूलन संबंधी कानूनों की जानकारी दी जाती है । घरों एवं कार्यस्थलों में महिलाओं पर अत्याचार, दहेज संबंधी कानून, महिलाओं के संपत्ति संबंधी अधिकार तथा स्त्री-पुरुष समानता से जुड़े विषयों पर भी लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है । उपभोक्ता संरक्षण कानून, बाल-विवाह अधिनियम, भ्रूण हत्या, चुड़ैल के नाम पर हत्या जैसे विषय भी इस प्रशिक्षण में शामिल हैं । मिलेनियम डेवलपमेंट गोल के संबंध में भी प्रशिक्षण दिया जाता है। तीन दिन के इस निःशुल्क प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षुओं को भोजन, पुस्तकें एवं महत्वपूर्ण दस्तावेज उपलब्ध कराने की व्यवस्था है ।
इस अनोखे कार्यक्रम से संस्थान के महानिदेशक अशोक कुमार सिंह बहुत उत्साहित हैं । उनके अनुसार, इस प्रशिक्षण का उद्देश्य नई पीढ़ी को सृजनात्मक कामों में लगाकर बेहतर नागरिक बनाना है । नौजवान कभी न तो खुद भ्रष्ट बनना चाहते हैं और न ही उन्हें भ्रष्टाचार पसंद है । परिस्थितियां उन्हें भ्रष्टाचार से समझौते के लिए विवश करती हैं । प्रारंभ में ही अधिकारों की जानकारी मिल जाए और भ्रष्टाचार या अन्याय से लड़ने के कानूनी तरीकों की जानकारी हो तो उन्हें गलत चीजों से समझौता नहीं करना पड़ेगा । महिलाओं के लिए इतने सारे कानून हैं इसके बावजूद वे विभिन्न किस्म के उत्पीड़न को सहती हैं क्योंकि उन्हें अधिकारों और कानूनों की जानकारी नहीं हैं । इसीलिए यह प्रशिक्षण एक बड़ा बदलाव लाने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है ।
एटीआई से प्रशिक्षण पाने के बाद अभिषेक पांडेय नामक युवक ने अपनी छात्रवृत्ति की राशि हासिल कर ली । यह बेहद दिलचस्प अनुभव रहा । अभिषेक उन आठ विद्यार्थियों में एक हैं जिन्हें संयुक्त ग्रांट आयोग (यूजीसी) की स्नातकोत्तर मेरिट छात्रवृत्ति देने की घोषणा हुई थी । प्रत्येक विद्यार्थी के लिए ४० हजार रुपए की दर से यूजीसी ने ३.२० लाख रुपए रांची विश्वविद्यालय को मार्च २००९ में ही भेज दिए । लेकिन विद्यार्थियों को यह राशि नहीं मिली । अभिषेक ने यूजीसी से सूचना मांगी तो इसका सबूत मिल गया । इसके आधार पर विद्यार्थियों ने छात्रवृत्ति की राशि हासिल कर ङ"ख११ऋ
(रांची से विष्णु राजगढ़िया,संडे नई दुनिया,18 अप्रैल,2010)
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