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19 अप्रैल 2010

पूर्वोत्तर में शिक्षण संस्थानों की बाढ़ से बदली तस्वीर

वे दिन गए जब पूर्वोत्तर के छात्रों को उच्च शिक्षा के लिए दिल्ली, बेंगलुरु, चैन्नई, पुणे, भोपाल आदि शहरों में जाने की मजबूरी थी । अब गुवाहाटी उच्च तकनीकी शिक्षा का हब बनता जा रहा है । यहां बेहतर सुविधा और शिक्षकों से लैस शिक्षण संस्थानों की संख्या लगातार बढ़ रही है । असम के साथ पूर्वोत्तर के विभिन्न राज्यों के छात्र बाहर जाने के बजाय गुवाहाटी में पढ़ाई करने में दिलचस्पी ले रहे हैं । हालांकि इसकी एक बड़ी वजह राज्य के बाहर के शहरों में बाहरी छात्रों के साथ मार-पीट की घटनाएं भी हैं । पूर्वोत्तर की लड़कियों के साथ दिल्ली में घटी घटनाओं ने अभिभावकों को सोचने पर मजबूर कर दिया । दूसरे राज्यों में जैसे-तैसे प्रवेश लेने व फिर अपने पालितों के रहने-खाने व फीस आदि की व्यवस्था में लाखों रुपए का खर्च तो लगता ही है, साथ ही, अक्सर वहां पूर्वोत्तर के विद्यार्थियों को अप्रिय तथा अराजक घटनाओं से दो-चार होना पड़ता है । इसके चलते अभिभावक लगातार चिंता में पड़े रहते हैं । हाल के दिनों में बेंगलुरु, नोएडा, दिल्ली, मुंबई, पुणे यहां तक कि सिक्किम, मणिपाल विश्वविद्यालय की घटनाएं भी इसकी गवाह हैं । गुवाहाटी से पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में आना-जाना भी आसान है । साथ ही, गुवाहाटी में वे खुदको सुरक्षित पाते हैं । यही वजह है कि गुवाहाटी में छोटे-बड़े संस्थान खोलने की होड़ लग गई है । हवाईमार्ग से गुवाहाटी जुड़ा हुआ है । दिन में कोलकाता और दिल्ली के लिए कई उड़ाने हैं। इससे विशेष क्लास लेने के लिए आने वाले शिक्षकों को आने-जाने में सुविधा होती है । बाहरी शिक्षक चाहें तो सुबह आकर शाम में लौट सकते हैं। इससे गुवाहाटी के शिक्षा संस्थानों को अच्छी फैकल्टी बुलाने में असुविधा नहीं होती है । फिर कानून-व्यवस्था के मामले में भी गुवाहाटी पूर्वोत्तर का सबसे सुरक्षित शहर है । असम सरकार भी निजी शिक्षा संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है ।

असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई गुवाहाटी को तकनीकी शिक्षा का हब बनाने में विशेष रुचि ले रहे हैं । उनका मानना है कि इससे प्रतिभा का पलायन रुकेगा । वह केंद्र सरकार की मदद से तकनीकी संस्थानों को लाने के साथ निजी संस्थानों को हर तरह की मदद देने की अपील कर चुके हैं । इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव परिलक्षित होने लगे हैं । पहले उग्रवाद, आतंकवाद और कानून-व्यवस्था की स्थिति के कारण निजी संस्थान निवेश से घबड़ाते थे लेकिन अब हालात बदले तो वे आगे बढ़े हैं । अब उनकी रुचि असम तथा पूर्वोत्तर के अन्य भागों में उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों की स्थापना की तरफ बढ़ी है ।

रॉयल गु्रुप ऑफ इंस्टिट्यूशंस के "रॉयल स्कूल ऑफ बिजनेस" और "रॉयल स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी" ने अपने छोटे से स्थापना काल में ही उच्च तकनीकी तथा प्रबंधकीय शिक्षा के क्षेत्र में बहुत नाम कमाया है । देश का पहला "इंटीग्रेटेड कैंपस विथ मल्टीडिसिप्लिन" होने का सुयश पा चुका यह संस्थान अपने विद्यार्थियों को विश्व स्तरीय ज्ञान उपलब्ध कराने तथा उन्हें नौकरी खोजने वाले की जगह नौकरी देने वाले के रूप में विकसित करने के लक्ष्य के साथ आगे बढ़ रहा है । हाल में इस संस्थान में पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजी अब्दुल कलाम नेअब उच्च शिक्षा के लिए पूर्वोत्तर के छात्रों को किसी दूसरे राज्य में पलायन करने की जरूरत नहीं है।
(रविशंकर रवि,संडे नई दुनिया,18 अप्रैल,2010)

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